राजस्थान में ‘हर घर जल’ पहुंचाने का दावा करने वाला जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) खुद गहरे संकट के दलदल में फंस गया है। जिस बजट के भरोसे प्रदेश की प्यास बुझनी थी, उसी बजट के गणित ने विभाग को केंद्र का कर्जदार बना दिया है। जहां PHED को उम्मीद थी कि केंद्र से 1500 करोड़ रुपये की संजीवनी मिलेगी, वहीं NJJM (राष्ट्रीय जल जीवन मिशन) के एक नए फॉर्मूले ने राजस्थान की उम्मीदों पर ‘पानी’ फेर दिया है।
बजट का ‘मायाजाल’: उम्मीद 1500 करोड़ की, निकले कर्जदार:-
राजस्थान PHED के गलियारों में सन्नाटा पसरा है। Financial Reconciliation (वित्तीय मिलान) की नई गणना ने विभाग के अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए हैं। केंद्र ने NJJM पोर्टल पर गणना का तरीका बदल दिया है। अब 10% जनसहभागिता (Public Participation) और O&M (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) के बजट को मुख्य गणना से बाहर कर दिया गया है। इस नए समीकरण के कारण केंद्र का कहना है कि राजस्थान को उसकी पात्रता से ज्यादा बजट पहले ही दिया जा चुका है। यानी, जिसे विभाग ‘हक’ समझ रहा था, वह अब ‘उधारी’ बन गया है।
PHED की वो 3 बड़ी गलतियां, जो बनीं मुसीबत: केंद्र (NJJM) ने पोर्टल पर तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी, जिसने विभाग की पोल खोल दी:-
-O&M पॉलिसी का अभाव: विभाग अब तक ऑपरेशन और मेंटेनेंस की ठोस पॉलिसी नहीं बना पाया।
-डाटा एंट्री में चूक: नए फॉर्मूले के हिसाब से पोर्टल पर जानकारी अपडेट करने में विभाग पिछड़ गया।
-वित्तीय तालमेल की कमी: फंड के इस्तेमाल और उसकी रिपोर्टिंग के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
2500 करोड़ की देनदारी: अब काम होगा या ठप?
यह खबर तब आई है जब प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत ठेकेदारों और अन्य मदों में 2500 करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारियां बाकी हैं। अगर केंद्र से नया बजट नहीं मिला और उल्टा पिछला पैसा ‘एडजस्ट’ किया गया, तो प्रदेश में चल रहे जेजेएम के हजारों प्रोजेक्ट्स का क्या होगा? क्या ठेकेदार काम रोक देंगे?
मुश्किल में ‘राजस्थान सरकार’:-
केंद्र की सख्ती और पोर्टल के ‘नए फॉर्मूले’ ने राजस्थान सरकार के लिए दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ जनता को पानी देने का वादा है, तो दूसरी तरफ खाली खजाना। अब देखना यह है कि राजस्थान PHED इस बजट संकट से बाहर निकलने के लिए केंद्र के सामने क्या दलीलें पेश करता है या फिर प्रदेश की योजनाओं पर ‘ब्रेक’ लगना तय है।
