जेजेएम घोटाले में बड़ी कार्रवाई: राजस्थान के पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल 960 करोड़ रुपये के घोटाले मामले में गिरफ्तार!

राजस्थान के बहुचर्चित और हजारों करोड़ों के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को एक बहुत बड़ी सफलता मिली है। गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 को एसीबी द्वारा गठित एसआईटी (SIT) ने इस मामले के मुख्य आरोपियों में से एक, पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी सुबोध अग्रवाल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है।

गिरफ्तारी और आगामी प्रक्रिया

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (एसीबी) स्मिता श्रीवास्तव के सुपरविजन में कार्य कर रही टीम ने सुबोध अग्रवाल को दिल्ली में हिरासत में लिया. एसीबी कोर्ट ने उनके खिलाफ पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी किया हुआ था. टीम उन्हें जल्द ही जयपुर लाएगी, जहाँ उनसे विस्तृत पूछताछ की जाएगी।

घोटाले का स्वरूप और कार्यप्रणाली

जांच में सामने आया कि प्रकरण संख्या 245/2024 के तहत फर्म मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवैल कम्पनी और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवैल कम्पनी ने इरकॉन इन्टरनेशनल लि. के फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र तैयार किए। इन जाली दस्तावेजों के आधार पर जलदाय विभाग के उच्चाधिकारियों से मिलीभगत कर करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडर प्राप्त किए गए।

जांच के दौरान यह भी प्रमाणित हुआ है कि तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (PHED) सुबोध अग्रवाल एवं अन्य उच्चाधिकारियों ने आपराधिक मंशा के साथ 50 करोड़ रुपये से अधिक की निविदाओं (मेजर प्रोजेक्ट्स) में ‘साइट विजिट प्रमाण-पत्र’ की बाध्यता जोड़ दी। यह नियम विरुद्ध कदम केवल इसलिए उठाया गया ताकि बोलीदाताओं की पहचान उजागर हो सके और टेंडर पुलिंग (Tender Pooling) की जा सके। इसके परिणामस्वरूप 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक ऊंचे टेंडर प्रीमियम प्राप्त हुए और कुल मिलाकर लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के टेंडरों में पद का दुरुपयोग किया गया।

अब तक की गिरफ्तारियां और फरार आरोपी

इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

  • दिनेश गोयल (मुख्य अभियन्ता, प्रशासन)
  • के.डी. गुप्ता (मुख्य अभियन्ता, ग्रामीण)
  • सुभांशु दीक्षित (तत्कालीन सचिव, RWSSMB)
  • सुशील शर्मा (वित्तीय सलाहकार, अक्षय ऊर्जा)
  • निरिल कुमार (मुख्य अभियन्ता, चूरू)
  • विशाल सक्सेना (अधिशाषी अभियन्ता, वर्तमान में निलंबित)
  • अरूण श्रीवास्तव (अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता, सेवानिवृत्त)
  • डी. के. गौड़ (तत्कालीन मुख्य अभियन्ता, सेवानिवृत्त)
  • महेन्द्र प्रकाश सोनी (तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, सेवानिवृत्त)
  • मुकेश पाठक (निजी व्यक्ति)

वहीं, मामले में तीन अन्य आरोपी—मुकेश गोयल (तत्कालीन अधीक्षण अभियंता), जितेन्द्र शर्मा (तत्कालीन अधिशाषी अभियंता) और संजीव गुप्ता (निजी व्यक्ति)—अभी भी फरार हैं। इनके खिलाफ न्यायालय ने स्थायी वारंट जारी किए हैं और उन्हें भगोड़ा घोषित कर उनकी संपत्ति कुर्की की कार्यवाही की जा रही है।

जांच टीम और आगामी रणनीति

इस पूरे प्रकरण की जांच उप महानिरीक्षक पुलिस डॉ. रामेश्वर सिंह एवं उप महानिरीक्षक पुलिस ओमप्रकाश मीणा के निर्देशन में गठित एसआईटी द्वारा की जा रही है. टीम ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया है, जिसके आधार पर यह बड़ी गिरफ्तारी संभव हो सकी है।

Share This Article
Leave a Comment