जयपुर, गुलाबी नगरी जयपुर शनिवार को एक ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी। 78वें सेना दिवस के उपलक्ष्य में सवाई मानसिंह (SMS) स्टेडियम में आयोजित ‘शौर्य संध्या’ में भारतीय थल सेना की सप्त शक्ति कमान ने अपनी अदम्य वीरता और आधुनिक सैन्य शक्ति का ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। यह पहली बार है जब सेना दिवस का मुख्य आयोजन किसी सैन्य छावनी (Cantonment) से बाहर आम जनता के बीच आयोजित किया जा रहा है।
ड्रोन शो: आकाश में दिखी ‘विकसित भारत’ की झलक
शौर्य संध्या का सबसे बड़ा आकर्षण 1,000 स्वदेशी ड्रोन्स का भव्य शो रहा। जयपुर के आसमान में इन ड्रोन्स ने भगवान कृष्ण के रथ पर सवार अर्जुन, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज और तिरंगे की आकृतियां बनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस शो के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत-2047’ के विजन को तकनीक के साथ प्रस्तुत किया गया।
1947 से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक: जीवंत हुई गौरवगाथा
कार्यक्रम में एक विशेष नाट्य प्रस्तुति और लघु फिल्म के जरिए भारतीय सेना के सफर को दिखाया गया:
- ऐतिहासिक युद्ध: 1947 के कबाइली हमले से लेकर 1965, 1971 और कारगिल युद्ध के पराक्रम को जीवंत किया गया।
- ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति के प्रतीक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की गाथा दिखाई गई, जिसमें सेना ने दुश्मन को महज 88 घंटों में घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।
- साहस का प्रदर्शन: शत्रुजीत ब्रिगेड के पैरा मोटर्स का रोमांचक प्रदर्शन और पारंपरिक युद्ध कलाओं मलखंभ एवं कलारिपयट्टू ने दर्शकों में जोश भर दिया।
राजस्थान: वीरों की भूमि को सलाम
दक्षिण पश्चिमी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान की माटी महाराणा प्रताप और परमवीर चक्र विजेताओं की भूमि है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर सेना दिवस को दिल्ली से बाहर आयोजित करने की परंपरा शुरू हुई है, ताकि देश का आम नागरिक अपनी सेना के बलिदान को करीब से महसूस कर सके।
क्यों खास है 15 जनवरी?
15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने आजाद भारत के पहले भारतीय सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था। इसी ऐतिहासिक दिन की याद में हर साल सेना दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2023 से इसे दिल्ली से बाहर (बेंगलुरु, लखनऊ, पुणे) मनाया जा रहा है, लेकिन 2026 का यह जयपुर आयोजन छावनी क्षेत्र से बाहर होने वाला देश का पहला आयोजन है।
इस अवसर पर प्रमुख शासन सचिव नवीन जैन, खेल सचिव नीरज के. पवन, जिला कलेक्टर डॉ. जितेंद्र सोनी सहित सेना के वरिष्ठ अधिकारी और हजारों की संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
