जयपुर। राजस्थान विधानसभा में शून्यकाल के दौरान ‘आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी’ घोटाले का मुद्दा एक बार फिर जोर-शोर से गूंजा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश के लाखों निवेशकों की गाढ़ी कमाई लूटने वालों को सजा दिलाने के बजाय सरकार उन्हें संरक्षण दे रही है।
“22 लाख परिवारों के भरोसे का कत्ल”
सदन को संबोधित करते हुए टीकाराम जूली ने अत्यंत कड़े शब्दों में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा:
“यह सिर्फ पैसों की ठगी का मामला नहीं है, बल्कि राजस्थान के 22 लाख परिवारों के भरोसे का कत्ल है। प्रदेश के करीब 22 लाख निवेशकों की लगभग 14,000 करोड़ रुपये की जीवन भर की पूंजी इस घोटाले में फंसी हुई है। करीब 200 लोगों के एक संगठित गिरोह ने 125 से अधिक शेल कंपनियां बनाकर आम जनता की मेहनत की कमाई को हड़प लिया। यह राजस्थान के इतिहास का सबसे बड़ा संगठित आर्थिक अपराध है।”
वकीलों की नियुक्ति पर उठाए गंभीर सवाल
टीकाराम जूली ने सदन में एक चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की मंशा पीड़ितों को न्याय दिलाने की नहीं है। उन्होंने कहा:
“हैरानी की बात यह है कि इस मामले में राजस्थान सरकार ने उन वकीलों को ही अपना पक्ष रखने के लिए नियुक्त कर दिया है, जो कल तक इस घोटाले के मुख्य आरोपियों की तरफ से अदालतों में पैरवी कर रहे थे। जब आरोपियों के पैरोकार ही सरकार के वकील बन जाएंगे, तो 22 लाख निवेशकों को न्याय कैसे मिलेगा? क्या सरकार आरोपियों को बचाना चाहती है?”
जीरो टॉलरेंस के दावे पर प्रहार
जूली ने सरकार के ‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं दूसरी तरफ इतने बड़े घोटाले के पीड़ितों को सड़कों पर ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया गया है। उन्होंने मांग की कि आरोपियों के वकीलों को तुरंत सरकारी पैनल से हटाया जाए और मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
सदन में हंगामा
टीकाराम जूली के इन तीखे तेवरों और गंभीर आरोपों के बाद सदन में काफी हंगामा हुआ। विपक्षी सदस्यों ने “निवेशकों को न्याय दो” के नारे लगाए। जूली ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही निवेशकों का पैसा वापस दिलाने के लिए ठोस रोडमैप तैयार नहीं किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस पार्टी प्रदेश भर में उग्र आंदोलन करेगी।
मुख्य बिंदु-
घोटाला: आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी।
प्रभावित: 22 लाख निवेशक, 14,000 करोड़ रुपये।
मुख्य आरोप: सरकार ने आरोपियों के वकीलों को ही सरकारी वकील बनाया।
बयान: “यह 22 लाख परिवारों के भरोसे का कत्ल है।” — टीकाराम जूली।
