पंचायत-निकाय चुनाव टालने की तैयारी: राज्य सरकार इसी हफ्ते जाएगी कोर्ट, ओबीसी रिपोर्ट का देगी हवाला

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर चल रही खींचतान अब कोर्ट की दहलीज तक पहुँच गई है। राज्य सरकार इसी सप्ताह अदालत में एक अंतरिम प्रार्थना पत्र (Interim Application) पेश करने जा रही है, जिसमें चुनाव कराने के लिए निर्धारित समय सीमा को बढ़ाने की मांग की जाएगी।

15 अप्रैल की डेडलाइन और सरकार की दलील गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पूर्व में 15 अप्रैल तक चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए थे। अब राज्य सरकार इस समय सीमा को बढ़वाने के लिए ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग (OBC Commission) की रिपोर्ट को आधार बनाएगी। चूंकि सरकार ने हाल ही में इस आयोग का कार्यकाल सितंबर तक बढ़ा दिया है, इसलिए सरकार का तर्क है कि बिना रिपोर्ट के आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होगी और चुनाव कराना संभव नहीं है।

7 पत्रों को किया गया नजरअंदाज खबरों के मुताबिक, पिछले साढ़े तीन महीनों में राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव तैयारियों को लेकर स्वायत्त शासन (UDH) और पंचायती राज विभाग को करीब 7 अलग-अलग पत्र लिखे थे। हालांकि, सरकार की ओर से एक भी पत्र का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की मंशा प्रदेश में ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ के फार्मूले को लागू करने की है, जिसके चलते इन पत्रों को नजरअंदाज किया गया।

निर्वाचन आयोग ने शुरू की अपनी तैयारी सरकार की ओर से सुस्ती को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने 20 फरवरी को एकतरफा कार्रवाई करते हुए 196 निकायों के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्यक्रम जारी कर दिया था। इन क्षेत्रों में 22 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होना है। वहीं, शेष 113 निकायों के लिए भी 24 मार्च को अलग से कार्यक्रम जारी किया जा चुका है।

क्या है सरकार की रणनीति? सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ पर केंद्रित है। यदि कोर्ट से समय वृद्धि मिल जाती है, तो सरकार को ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आने तक (सितंबर तक) का समय मिल जाएगा। इससे स्थानीय निकायों और पंचायतों के चुनाव एक साथ कराने का रास्ता साफ हो सकता है। अब सबकी नजरें इस हफ्ते कोर्ट में पेश होने वाली अर्जी और उस पर आने वाले फैसले पर टिकी हैं।


मुख्य बिंदु: क्यों फंसा है पेंच?

  • डेडलाइन: कोर्ट ने 15 अप्रैल तक चुनाव कराने को कहा था।
  • ओबीसी फैक्टर: ओबीसी आयोग का कार्यकाल सितंबर तक बढ़ा, जिसे सरकार ढाल बना रही है।
  • प्रशासनिक चुप्पी: विभागों ने चुनाव आयोग के किसी भी पत्र का स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
  • वोटर लिस्ट: आयोग ने अपनी तरफ से मतदाता सूची अपडेट करने का काम शुरू कर दिया है।
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