जयपुर: राजधानी के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल स्थित ट्रॉमा सेंटर में हुई अग्निकांड की घटना के बाद शासन द्वारा की गई प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध शुरू हो गया है। राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (RMCTA) ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर इस मामले में चिकित्सा अधीक्षक, नोडल अधिकारी के विरुद्ध जारी चार्जशीट और नर्सिंग कर्मियों के निलंबन पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। एसोसिएशन का तर्क है कि अस्पताल की बिल्डिंग की संरचना, बिजली की वायरिंग और अग्नि सुरक्षा प्रणाली का रखरखाव तकनीकी विभागों और अभियंताओं (Engineers) के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि चिकित्सकीय प्रशासन के, ऐसे में तकनीकी त्रुटियों के लिए डॉक्टरों को उत्तरदायी ठहराना न्यायसंगत नहीं है।

एसोसिएशन ने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि घटना के समय चिकित्सा कर्मियों ने बिना किसी विशेष तकनीकी प्रशिक्षण के साहस दिखाते हुए मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला था, जिसकी सराहना हर तरफ हुई थी। RMCTA ने चेतावनी दी है कि बिना उचित जांच के की गई ऐसी कार्रवाई से समर्पित चिकित्सा कर्मियों का मनोबल गिर सकता है। उन्होंने मांग की है कि इस घटना की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराई जाए और यदि रखरखाव में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित तकनीकी विभागों और अभियंताओं के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमित फायर ऑडिट और कर्मचारियों को आपातकालीन प्रशिक्षण देने का भी सुझाव दिया गया है
RMCTA की प्रमुख मांगें:
- चिकित्सा अधीक्षक और नोडल अधिकारी के विरुद्ध जारी चार्जशीट पर पुनर्विचार किया जाए ।
- निलंबित नर्सिंग कर्मचारियों को तत्काल बहाल किया जाए ।
- घटना की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराई जाए ।
- यदि लापरवाही पाई जाए, तो संबंधित इंजीनियरों और तकनीकी विभागों के विरुद्ध कार्रवाई हो ।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमित अग्नि सुरक्षा ऑडिट और कर्मचारियों के लिए आपातकालीन प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए ।
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे इस संवेदनशील मामले में न्यायोचित निर्णय लें ताकि चिकित्सा समुदाय का मनोबल बना रहे ।
