RIFF 2026: “आधुनिकता की दौड़ में संकट में है सांस्कृतिक पहचान”, जोधपुर में राजस्थानी सिनेमा के भविष्य पर मंथन

जोधपुर, राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (RIFF) के 12वें संस्करण के तहत सोमवार को जोधपुर के मिराज सिनेमा (ब्लू सिटी मॉल) में ‘ओपन फोरम’ का आयोजन किया गया। इस सत्र का मुख्य विषय “सिनेमा: क्षेत्रीय भाषाएं और राजस्थानी भाषा की पहचान, भविष्य और चुनौतियां” रहा। कार्यक्रम में राजनीतिक दिग्गजों और फिल्म जगत की हस्तियों ने राजस्थानी भाषा को डिजिटल युग में नई ऊंचाइयों पर ले जाने के रोडमैप पर चर्चा की।

कला और संस्कृति समाज की आत्मा: सतीश पुनिया

टॉक शो में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद भाजपा हरियाणा प्रभारी एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया ने लोक भाषाओं के विलुप्त होने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा:

“आज की भागदौड़ भरी आधुनिकता में हमारी लोक भाषा, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान खतरे में है। कला और संस्कृति केवल मुनाफे का जरिया नहीं, बल्कि समाज की आत्मा होती है। RIFF जैसे मंच नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम हैं।”

राजस्थानी सिनेमा का ‘पुनर्जागरण’: स्टेज OTT की भूमिका

स्टेज (STAGE) OTT राजस्थान की कंटेंट हेड रेनू राणा ने राजस्थानी फिल्म इंडस्ट्री के गौरवशाली इतिहास को याद किया। उन्होंने कहा कि एक समय राजस्थानी सिनेमा देश की शुरुआती क्षेत्रीय इंडस्ट्रीज में शीर्ष पर था। अब ‘स्टेज’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से वेब सीरीज और फीचर फिल्मों के जरिए थिएटर आर्टिस्ट्स और स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है, जिससे राजस्थानी सिनेमा का ‘गोल्डन एरा’ वापस लौटने की उम्मीद है।

कंटेंट और लोक संगीत पर विशेष जोर

चर्चा में विशेषज्ञों ने गुणवत्तापूर्ण कंटेंट पर अपने विचार रखे:

  • लेखक-निर्देशक पंकज तंवर: उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में केवल बेहतर कहानी और गीत ही टिक पाएंगे। दर्शकों की पसंद को समझना ही फिल्म निर्माता की असली कसौटी है।
  • निर्देशक कपिल तंवर और संगीतकार अजय सोनी: कपिल ने बताया कि उन्होंने बॉलीवुड संगीत के बजाय राजस्थान के स्थानीय लोक वाद्ययंत्रों और ‘घूमर’ जैसे पारंपरिक संगीत को प्राथमिकता दी है। उनका मानना है कि स्थानीय संगीत में जोखिम है, लेकिन यही राजस्थान की असली पहचान है।
  • ऋषि सिंह सिसौदिया (टी-सीरीज): उन्होंने राजस्थानी गानों के सही विज़ुअलाइजेशन और प्रमोशन की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि लंगा-मंगणियार जैसी लोक कलाएं वैश्विक स्तर पर मजबूत बनें।

मातृभाषा के लिए भावुक अपील

फेस्टिवल डायरेक्टर सोमेंद्र हर्ष ने एक प्रेरक अपील करते हुए कहा कि पेशेवर जीवन के लिए अंग्रेजी जरूरी हो सकती है, लेकिन घर और समाज में हमें अपनी मातृभाषा ‘राजस्थानी’ का ही प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी में भी गर्व से राजस्थानी बोलने की वकालत की।


विशेष आकर्षण: आज 20 से अधिक फिल्मों का निःशुल्क प्रदर्शन

RIFF के तहत मंगलवार को मिराज सिनेमा में दर्शकों के लिए फिल्मों का महाकुंभ सजेगा। इसमें 20 से अधिक फिल्मों का निःशुल्क प्रदर्शन किया जाएगा, जिनमें प्रमुख हैं:

  • रघुवीरम – द बर्डसॉन्ग
  • टुकटुक वाली
  • घूमर
  • लॉर्ड्स सिग्नल
  • स्ट्रेज़ और ऐ ज़िंदगी
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