जयपुर, राजस्थान सरकार विशेष योग्यजनों (दिव्यांगजनों) के जीवन को सुगम और स्वावलंबी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में बुधवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने जयपुर स्थित ‘अम्बेडकर भवन’ मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उन शोध संस्थानों, संगठनों और विशेषज्ञों के प्रस्तुतिकरण (प्रजेंटेशन) देखे गए जो कृत्रिम अंगों और उपकरणों को अधिक सुविधाजनक व आधुनिक बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
बजट घोषणा 2025-26 की अनुपालना
मंत्री गहलोत ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में विशेष योग्यजनों को संबल देने के लिए आर्टिफिशियल लिंब्स (कृत्रिम अंग) और उपकरणों की गुणवत्ता पर शोध करने की घोषणा की थी। इसी घोषणा को अमलीजामा पहनाने के लिए विभिन्न संस्थानों से ‘अभिरुचि की अभिव्यक्ति’ (EOI) आमंत्रित की गई थी।
हल्का, किफायती और सहज तकनीक पर जोर
बैठक के दौरान मशहूर कंपनियों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने शोध विचार साझा किए। श्री गहलोत ने शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करते हुए मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने को कहा:
- हल्कापन: उपकरण भारी न हों ताकि उपयोग में आसानी रहे।
- किफायती: तकनीक ऐसी हो जो आम दिव्यांगजन की पहुंच में हो।
- सहजता: कृत्रिम अंगों का डिजाइन प्राकृतिक अंगों के करीब और आरामदायक हो।
मंत्री ने गर्व के साथ कहा कि राजस्थान देश का पहला राज्य है जहां सरकार इतनी संवेदनशीलता के साथ दिव्यांगजनों के लिए अत्याधुनिक शोध को बढ़ावा दे रही है। यह नवाचार उनके आत्मविश्वास और सम्मान को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा।
बैठक में उपस्थित अधिकारी एवं प्रतिनिधि
इस उच्च स्तरीय बैठक में विशेष योग्यजन निदेशालय के आयुक्त श्री इकबाल खान, अतिरिक्त निदेशक चंद्रशेखर चौधरी और महावीर विकलांग सहायता समिति सहित कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रतिनिधि जैसे डॉ. वैभव भंडारी, क्षितिज शर्मा और डॉ. अमित नाटाणी उपस्थित रहे।
