जयपुर। राजस्थान का जल जीवन मिशन (JJM) घोटाला देश के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार प्रकरणों में से एक रहा, जिसने न केवल शासन व्यवस्था को हिला दिया था, बल्कि प्यासे गांवों की उम्मीदों पर भी ‘कमीशन’ का पहरा लगा दिया था। इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ था जब भ्रष्टाचार की पाइपलाइन सीधे जयपुर के एक होटल तक पहुँच गई थी।
अगस्त 2023: होटल पोलो विक्ट्री में बिछाया गया था जाल
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस महाघोटाले की पहली ईंट अगस्त 2023 में उखाड़ी थी। तब जलदाय विभाग (PHED) के अधिकारी घूस लेने के लिए बहरोड़ से जयपुर आए थे। एसीबी ने सिंधी कैंप स्थित होटल पोलो विक्ट्री के पास जाल बिछाकर एक्सईएन मायालाल सैनी और जेईएन प्रदीप को 2.20 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
होटल बना था ‘ऑफिस’: जांच में सामने आया था कि ठेकेदार पदमचंद जैन की फर्म (श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी) के बिल होटल के कमरों में बैठकर बनाए जाते थे। पाइपलाइन और टंकियों की माप पुस्तिका (MB) वहीं भरी जाती थी और इंजीनियर वहीं बैठकर फाइलों पर साइन करते थे।
मार्च 2024: ईडी की एंट्री और पीयूष जैन की गिरफ्तारी एसीबी की कार्रवाई के बाद मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। 1 मार्च 2024 को ईडी ने इस मामले में पहली बड़ी गिरफ्तारी करते हुए ठेकेदार पदमचंद जैन के बेटे पीयूष जैन को दबोच लिया था।
छापेमारी और जब्ती: इससे पहले 17 जनवरी 2024 को ईडी ने जयपुर और बांसवाड़ा में 8 ठिकानों पर तलाशी ली थी, जिसमें 11.42 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी। इसी दौरान पूर्व मंत्री महेश जोशी और कई सीनियर आईएएस अधिकारियों के ठिकानों पर भी सर्च ऑपरेशन चलाया गया था।
त्रिकोणीय जांच: जब ACB, ED और CBI ने घेरा
यह राजस्थान का ऐसा दुर्लभ मामला था जिसमें देश की तीन सबसे बड़ी जांच एजेंसियां—एसीबी, ईडी और सीबीआई—एक साथ सक्रिय हुई थीं।
फर्जी इरकॉन सर्टिफिकेट: जांच में यह कड़वा सच सामने आया था कि सैकड़ों करोड़ के टेंडर हासिल करने के लिए ‘इरकॉन’ के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और फर्जी आय प्रमाण पत्रों का सहारा लिया गया था।
मंत्री की गिरफ्तारी: तत्कालीन जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी को ईडी ने गिरफ्तार किया था, जिन्हें 6 महीने जेल में रहने के बाद हाल ही में दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी।
संपादकीय टिप्पणी: प्यासा प्रदेश और भरती तिजोरियां यह घोटाला केवल पैसों की हेराफेरी नहीं थी, बल्कि उन लाखों ग्रामीणों के साथ विश्वासघात था जो ‘नल से जल’ का इंतजार कर रहे थे। ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों के बीच अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत ने सरकारी खजाने को डकार लिया था। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर गठित एसआईटी और अन्य एजेंसियों की निरंतर कार्रवाई ने इस भ्रष्ट तंत्र की जड़ों को काटने का काम किया था।
