राजस्थान सहित पूरे देशभर में इस साल होली और धुलंडी की तारीखों को लेकर बनी हुई असमंजस की स्थिति अब पूरी तरह स्पष्ट हो गई है। पंचांग की नवीनतम गणना और ज्योतिषियों के अपडेट के अनुसार, इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 की शाम 5 बजकर 55 मिनट से शुरू हो रही है, जो अगले दिन 3 मार्च की शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। इस साल तिथियों के हेर-फेर और भद्रा के प्रभाव के साथ-साथ 3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी लग रहा है, जिसके कारण त्योहार की तारीखों में बड़ा बदलाव आया है। 3 मार्च को लगने वाले इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल सुबह 9 बजे से ही शुरू हो जाएगा, इसलिए इस दिन कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जा सकेगा।
2 मार्च की मध्यरात्रि को होगा होलिका दहन
चंद्र ग्रहण और भद्रा काल के साए के कारण होलिका दहन का सबसे सटीक और शास्त्र सम्मत समय 2 मार्च की रात को ही तय किया गया है। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन हमेशा पूर्णिमा तिथि और रात्रि काल में भद्रा मुक्त समय में किया जाना चाहिए। 2 मार्च को पूर्णिमा तिथि लगने के साथ ही भद्रा भी शुरू हो जाएगी। ऐसे में ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन करना सबसे श्रेष्ठ रहेगा। पंचांग के अनुसार 2 मार्च की मध्यरात्रि (रात 1 बजकर 26 मिनट से 2 बजकर 38 मिनट के बीच) भद्रा की पूंछ रहेगी, और यही समय होलिका दहन के लिए सबसे शुभ और दोषमुक्त माना गया है। जयपुर के आराध्य गोविंददेव जी मंदिर और सिटी पैलेस में भी इसी शास्त्र सम्मत मुहूर्त के अनुसार होलिका दहन की परंपरा निभाई जाएगी।
अब 3 की बजाय 4 मार्च को मनेगी धुलंडी
पहले यह माना जा रहा था कि 3 मार्च को धुलंडी मनाई जाएगी, लेकिन 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि के दौरान चंद्र ग्रहण और उसका सूतक काल मान्य होने के कारण इस दिन रंग वाली होली खेलना शुभ नहीं माना गया है। ज्योतिषाचार्यों ने स्पष्ट किया है कि रंगो वाली होली हमेशा चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि को खेली जाती है। यह तिथि 4 मार्च को उदयकाल में प्राप्त हो रही है, इसलिए चंद्र ग्रहण के साए से मुक्त होकर पूरे प्रदेश में धुलंडी (रंगों का पर्व) 4 मार्च 2026 को ही पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
