राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ वेटेनरी एंड एनिमल साइंसेज (राजुवास) के वाइस चांसलर (वीसी) की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। जस्टिस आनंद शर्मा की अदालत ने राज्यपाल और यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे को उनके सचिव के जरिए नोटिस जारी किया है। अदालत ने यह कार्रवाई डॉ. आर के बाघेरवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए की है। हाईकोर्ट ने राज्यपाल से इस मामले में तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
अधिवक्ता ने उठाई सर्च कमेटी के चेयरमैन की नियुक्ति पर अवैधता
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दिनेश यादव ने अदालत को बताया कि वीसी की नियुक्ति के लिए गठित सर्च कमेटी का चेयरमैन नियमों के विपरीत नियुक्त किया गया था। उन्होंने यूजीसी के नियमों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि सर्च कमेटी का चेयरमैन उस यूनिवर्सिटी से संबद्ध नहीं होना चाहिए। लेकिन राजुवास यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर त्रिभुवन शर्मा को कमेटी का चेयरमैन बना दिया, जो पहले इसी यूनिवर्सिटी के एनिमल न्यूट्रिशन विभाग के अध्यक्ष रह चुके हैं, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
वीसी को 10 साल का टीचिंग अनुभव नहीं, नियुक्ति रद्द करने की मांग
याचिका में नियुक्त वीसी डॉ. सुमंत व्यास की योग्यताओं पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि डॉ. व्यास के पास वीसी पद के लिए आवश्यक 10 साल का टीचिंग अनुभव नहीं है। हालांकि डॉ. व्यास ने राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (NRCC) में वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया है और वे काजरी जोधपुर के निदेशक भी रहे हैं, लेकिन टीचिंग अनुभव की कमी उन्हें इस पद के लिए अयोग्य बनाती है। ऐसे में हाईकोर्ट ने राज्यपाल, वीसी, रजिस्ट्रार और राज्य सरकार से इस अवैध नियुक्ति को रद्द करने की मांग पर जवाब मांगा है।
