राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ ने शुक्रवार को जयपुर डिस्कॉम की सीएमडी और चर्चित आईएएस अधिकारी आरती डोगरा को बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की खंडपीठ ने एकलपीठ के उस आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें आरती डोगरा के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को जांच के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सभी न्यायिक कार्यवाहियों (Proceedings) को भी तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है।
24 घंटे के भीतर ‘पावर गेम’ में न्यायिक मोड़
गौरतलब है कि महज एक दिन पहले, 23 अप्रैल को जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने एक टेक्नोक्रेट आर.के. मीणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणी की थी। एकलपीठ ने माना था कि डिस्कॉम सीएमडी ने विभागीय जांच पर निर्णय लेने में जानबूझकर देरी की, जो प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार की आशंका पैदा करता है। कोर्ट ने एसीबी को 3 माह में रिपोर्ट पेश करने को कहा था। इस फैसले के खिलाफ डिस्कॉम प्रबंधन और आरती डोगरा ने तुरंत खंडपीठ में अपील दायर की, जहाँ 24 घंटे के भीतर फैसला पलट गया।

न्यायालय की कार्रवाई: मुख्य बिंदु
| विवरण | जानकारी |
| याचिकाकर्ता | डिस्कॉम CMD आरती डोगरा एवं जयपुर डिस्कॉम |
| खंडपीठ का नेतृत्व | कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा |
| पैरवी की | वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एन. माथुर |
| ताजा आदेश | एकलपीठ के 23 अप्रैल के आदेश पर अंतरिम रोक |
| मामला | विभागीय जांच व डीपीसी प्रक्रिया में देरी |
वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एन. माथुर की दलीलें
सुनवाई के दौरान आरती डोगरा और डिस्कॉम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एन. माथुर ने जोरदार पक्ष रखा। उनकी मुख्य दलीलें इस प्रकार रहीं:
- प्रक्रियात्मक त्रुटि: एकलपीठ द्वारा सीधे एसीबी जांच के आदेश देना प्रक्रियात्मक रूप से सही नहीं है।
- तथ्यों की अनदेखी: मामले के प्रशासनिक पहलुओं और तकनीकी देरी को सीधे तौर पर ‘भ्रष्टाचार’ का रूप देना न्यायसंगत नहीं है।
- अधिकार क्षेत्र: अनुशासनात्मक प्राधिकारी के रूप में लिए गए निर्णयों में समय लगना एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, इसे आपराधिक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
खंडपीठ ने इन दलीलों को वजनदार मानते हुए एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी।
क्या है पूरा विवाद? (पृष्ठभूमि)
यह मामला दिसंबर 2023 में आर.के. मीणा द्वारा दायर एक याचिका से शुरू हुआ था। याचिकाकर्ता ने वर्ष 2022-23 की विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) में रोस्टर संधारण न होने को चुनौती दी थी। विवाद तब बढ़ा जब याचिका दायर होने के बाद याचिकाकर्ता को तीन अलग-अलग चार्जशीट थमा दी गईं। एकलपीठ ने पाया था कि जांच रिपोर्ट आने के बावजूद सीएमडी ने अंतिम निर्णय लेने में देरी की, जिसे कोर्ट ने ‘कर्तव्यों के निर्वहन में विफलता’ करार दिया था।
कौन हैं आरती डोगरा?
2006 बैच की आईएएस आरती डोगरा अपने सख्त प्रशासनिक कौशल के लिए जानी जाती हैं। 3 फीट 2 इंच कद की इस अधिकारी ने बीकानेर कलेक्टर रहते हुए ‘बंको बिकाणों’ अभियान से देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। वह मुख्यमंत्री सचिव जैसे अहम पदों पर भी रह चुकी हैं।
