राजस्थान में आगामी अक्षय तृतीया (आखातीज) और पीपल पूर्णिमा जैसे अबूझ सायों पर होने वाले बाल विवाहों को रोकने के लिए राज्य की भजनलाल सरकार ने कमर कस ली है। सरकार ने इस सामाजिक बुराई पर प्रभावी रोक लगाने के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अमले को ‘अलर्ट मोड’ पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
विभागीय समन्वय और 24 घंटे निगरानी राज्य सरकार ने न्यायपालिका, पुलिस, महिला एवं बाल विकास, चिकित्सा और पंचायती राज सहित सभी प्रमुख विभागों को एक साथ मिलकर काम करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक उपखंड मुख्यालय पर 24 घंटे संचालित नियंत्रण कक्ष (Control Room) स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर बाल विवाह की सूचना मिलते ही बिना किसी औपचारिक शिकायत के तत्काल मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
सहयोगियों पर गिरेगी कानूनी गाज इस बार की गाइडलाइन बेहद सख्त है। बाल विवाह करवाने वाले माता-पिता के साथ-साथ इसमें सहयोग करने वाले पंडित, हलवाई, टेंट हाउस संचालक, बैंड-बाजा दल और ट्रांसपोर्टर के खिलाफ भी गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। इन सभी व्यवसायियों से पहले ही लिखित में आश्वासन लिया जा रहा है कि वे किसी भी नाबालिग की शादी में अपनी सेवाएं नहीं देंगे।
प्रिंटिंग प्रेस और शादी के कार्ड के लिए नए नियम सरकार ने प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को विशेष निर्देश दिए हैं कि वे विवाह कार्ड छापते समय वर और वधु की जन्मतिथि कार्ड पर अनिवार्य रूप से अंकित करें। इसके साथ ही उन्हें उम्र के सत्यापन के लिए दस्तावेज (जैसे आधार कार्ड या मार्कशीट) देखना जरूरी होगा।
जागरूकता और गुप्त सूचना तंत्र ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की झिझक दूर करने के लिए स्कूलों, ग्राम सभाओं और सामाजिक संगठनों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखने के लिए गुप्त सूचना बॉक्स और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
अधिकारी का पक्ष: “बाल विवाह की रोकथाम के लिए राज्य सरकार की गाइडलाइन प्राप्त हो चुकी है। हम सभी विभागों के साथ समन्वय कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां प्रशासन पूरी सख्ती के साथ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।” — शिप्रा जैन, उपखण्ड अधिकारी, बस्सी।
