सड़कों पर ‘अंधा’ करने वाली एलईडी लाइटों पर सरकार का बड़ा प्रहार; अब वाहन मालिकों के साथ दुकानदार और मैकेनिक भी आएंगे रडार पर

राजस्थान की सड़कों पर रात के समय सामने वाले वाहन चालक को ‘अंधा’ कर देने वाली अवैध हाई-इंटेंसिटी एलईडी (LED) लाइटों के खिलाफ राज्य सरकार ने अब पूरी तरह से युद्ध स्तर पर मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने विधानसभा में आश्वस्त किया है कि अब केवल वाहन चालकों का चालान काटकर इतिश्री नहीं की जाएगी, बल्कि उन ऑटो एक्सेसरीज दुकानों और फिटिंग करने वाले मैकेनिकों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी जो इन अवैध लाइटों का कारोबार कर रहे हैं। परिवहन विभाग ने प्रदेशभर में इस दिशा में एक विशेष जांच अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

विधानसभा में गूंजा मुद्दा: हिण्डौन विधायक के सवाल पर सरकार का सख्त रुख

यह पूरा मामला विधानसभा में हिण्डौन विधायक अनीता जाटव द्वारा उठाए गए एक सवाल के बाद चर्चा में आया। विधायक ने सड़कों पर बढ़ते हादसों के लिए इन अवैध एलईडी लाइटों को एक प्रमुख कारण बताया था। सरकार ने जवाब में स्वीकार किया कि ऐसी लाइटों की तेज चमक (Glare) के कारण सामने से आने वाले चालक को कुछ सेकंड के लिए दिखना बंद हो जाता है, जिससे आए दिन गंभीर और जानलेवा सड़क हादसे हो रहे हैं। मोटर वाहन अधिनियम के तहत मूल हेडलाइट्स में किसी भी प्रकार का अनधिकृत बदलाव करना गैरकानूनी है।

दुकानदारों और मैकेनिकों पर भी शिकंजा: अवैध फिटिंग करने वालों की अब खैर नहीं

परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार अभियान का केंद्र केवल सड़कों पर चलने वाले वाहन ही नहीं, बल्कि वे दुकानें भी होंगी जहाँ ये लाइटें बेची जा रही हैं। विभाग की टीमें अब ऑटो मार्केट में दुकानों की औचक जांच करेंगी। यदि कोई दुकानदार या मैकेनिक नियमों के विरुद्ध हाई-बीम या फ्लैशिंग लाइट फिट करते पाया गया, तो उसकी दुकान का लाइसेंस रद्द करने से लेकर भारी जुर्माना लगाने तक का प्रावधान किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि यदि आपूर्ति के स्रोत पर ही अंकुश लगा दिया जाए, तो सड़कों पर इन लाइटों के उपयोग को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।

जुर्माना और कानूनी कार्रवाई: नियम तोड़ने पर देना होगा ₹5,000 तक का हर्जाना

मौजूदा नियमों के तहत, अवैध लाइटें लगाने वाले वाहन स्वामियों पर ₹1,000 से ₹5,000 तक के जुर्माने का प्रावधान है। धारा 177 और 190(2) के तहत पुलिस और आरटीओ (RTO) अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नाकेबंदी के दौरान ऐसी लाइटें पाए जाने पर उन्हें मौके पर ही उतरवाएं और संबंधित व्यक्ति का चालान काटें। वर्ष 2026 में लागू नए प्रवर्तन नियमों के तहत, बार-बार नियम तोड़ने वालों के वाहन जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

2026 की सख्ती: स्मार्ट कैमरों और ग्लेयर डिटेक्शन से होगी निगरानी

आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए, अब परिवहन विभाग ‘स्मार्ट एन्फोर्समेंट’ पर जोर दे रहा है। सड़कों पर लगे एआई-पावर्ड (AI-powered) कैमरे और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) अब रात के समय ‘ग्लेयर डिटेक्शन’ तकनीक के जरिए उन वाहनों की पहचान करेंगे जिनकी लाइटें निर्धारित सीमा से अधिक चमकदार हैं। इसका मतलब है कि यदि कोई पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद नहीं है, तब भी ऑटोमैटिक ई-चालान सीधे वाहन मालिक के घर पहुँच जाएगा।

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