जयपुर: राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को उस समय एक अजीब स्थिति पैदा हो गई जब सत्तापक्ष के ही मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग और विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) वासुदेव देवनानी के बीच प्रोटोकॉल को लेकर बहस छिड़ गई। स्पीकर ने मुख्य सचेतक की आपत्ति को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाही नियमों और अध्यक्ष की अनुमति से चलती है।
क्या था विवाद?
प्रश्नकाल के दौरान उप नेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा बार-बार खड़े होकर मंत्रियों से स्पष्टीकरण मांग रहे थे। इस पर सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने ‘व्यवस्था का प्रश्न’ उठाते हुए आपत्ति जताई। गर्ग ने तर्क दिया कि:
- रामकेश मीणा ‘उप नेता’ हैं, ‘नेता प्रतिपक्ष’ नहीं।
- उन्हें नेता प्रतिपक्ष वाला प्रोटोकॉल नहीं मिलना चाहिए।
- गर्ग ने पूर्व का उदाहरण देते हुए कहा कि जब गुलाबचंद कटारिया नेता प्रतिपक्ष थे, तब राजेंद्र राठौड़ (तत्कालीन उप नेता) को उनकी अनुपस्थिति में भी सवाल पूछने की इजाजत नहीं मिलती थी।
स्पीकर का सख्त रुख
स्पीकर वासुदेव देवनानी ने गर्ग की इस आपत्ति को तुरंत खारिज कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा:
“मैंने उप नेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा को अनुमति दी है। इसलिए वे प्रश्नकाल में किसी भी सवाल पर खड़े होकर मंत्री से जवाब मांग सकते हैं।”
सीवरेज प्लांट के मुद्दे पर बढ़ा हंगामा
यह पूरा दृश्य उस समय शुरू हुआ जब विधायक गोपीचंद मीणा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के पीपीपी मॉडल को लेकर सवाल पूछ रहे थे। नगरीय विकास राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा के जवाब के बीच में रामकेश मीणा ने हस्तक्षेप किया। स्पीकर की अनुमति के बाद भी रामकेश मीणा लगातार बोलते रहे और मंत्री के जवाब से संतुष्ट न होकर अंततः कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
सत्तापक्ष ने की निंदा
विपक्ष के इस व्यवहार पर संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कांग्रेसी सदस्यों द्वारा सदन छोड़कर जाने को ‘निंदनीय’ बताया और कहा कि सरकार हर सवाल का जवाब देने को तैयार है, लेकिन विपक्ष का व्यवहार उचित नहीं है।
