शिमला: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें याचिकाकर्ता के घर से जब्त की गई नकदी को वापस करने से इनकार कर दिया गया था । न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Cr.P.C.) के तहत संपत्ति को अनावश्यक रूप से पुलिस हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए ।
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मामले की मुख्य बातें:
- याचिकाकर्ता की मांग: निशांत सरीन ने सोलन की विशेष अदालत के 21 सितंबर 2023 के आदेश के खिलाफ अपील की थी, जिसमें पुलिस द्वारा उनके घर से बरामद किए गए नोटों को छोड़ने की मांग की गई थी ।
- जब्त किए गए ₹2,000 के नोट: जब्त की गई राशि में ₹2,000 के 300 नोट शामिल थे । अदालत ने संज्ञान लिया कि RBI की अधिसूचना के अनुसार ये नोट 30 सितंबर 2023 तक कानूनी रूप से वैध थे ।
- सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश: हाई कोर्ट ने सुंदरभाई अंबालाल देसाई बनाम सी.एम. मुदलियार मामले का हवाला देते हुए कहा कि धारा 451 के तहत शक्तियों का प्रयोग तेजी से किया जाना चाहिए ताकि मालिक को नुकसान न हो ।
अदालत द्वारा निर्धारित प्रक्रिया:
उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि नकदी को निम्नलिखित शर्तों के साथ रिलीज किया जाए:
- पंचनामा और इन्वेंट्री: नोटों का विस्तृत विवरण और सीरियल नंबर वाली इन्वेंट्री तैयार की जाएगी ।
- फोटोग्राफी: जब्त किए गए नोटों और सील किए गए पार्सल की तस्वीरें ली जाएंगी और उन पर याचिकाकर्ता के हस्ताक्षर कराए जाएंगे ।
- सुरक्षा और बांड: याचिकाकर्ता को नोट प्राप्त करने से पहले एक उचित बांड और सुरक्षा (security) जमा करनी होगी ।
निष्कर्ष: अदालत ने कहा कि पुलिस को जांच के लिए आवश्यक समय से अधिक संपत्ति को अपने पास नहीं रखना चाहिए और उचित प्रक्रिया का पालन कर इसे मूल मालिक को लौटाया जाना चाहिए ।
