कोटा: कोटा दक्षिण नगर निगम (Kota South Municipal Corporation) के अफसरों की ‘स्मार्ट सफाई’ की आड़ में एक बड़ा खेल सामने आया है। दस्तावेजों को अनदेखा करते हुए निगम ने 123 करोड़ रुपये का सफाई का ठेका ‘एसपीएस ट्रैश हैंडलर्स जेवी’ (SPS Trash Handlers JV) नामक जॉइंट वेंचर को दे दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस जॉइंट वेंचर की लीड पार्टनर फर्म ‘मैसर्स सुखपाल सिंह कंस्ट्रक्शन’ टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए सरकारी तौर पर प्रतिबंधित (Debarred) है।
झूठा शपथ पत्र और अफसरों की मेहरबानी
नियमों के अनुसार, डीबार होने के कारण यह फर्म टेंडर में भाग नहीं ले सकती थी। फर्म ने टेंडर डॉक्यूमेंट में डीबार न होने का झूठा शपथ पत्र पेश किया। जानकारी के मुताबिक, झालावाड़ नगर परिषद ने 19 अक्टूबर 2023 को ‘मैसर्स सुखपाल सिंह कंस्ट्रक्शन’ को तीन साल के लिए डीबार किया था और इसकी लिखित सूचना निगम के चीफ इंजीनियर को पत्र (क्रमांक 7771-74) के जरिए दी थी। निगम के पास फर्म के डीबार होने के दस्तावेज मौजूद थे, फिर भी अफसरों ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
UDH मंत्री ने दिए थे जांच के आदेश, निगम ने दे दिया वर्कऑर्डर
इस टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत 9 मई 2025 को UDH राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा तक पहुंची थी। मामले में तीन गंभीर आरोप थे: टेंडर राशि की स्वीकृति डीएलबी से न लेना, प्री-बिड मीटिंग में पूरी जानकारी न देना, और तकनीकी रूप से शर्तें सही न होना। मंत्री ने 15 मई 2025 को निदेशक को जांच के निर्देश दिए। लेकिन निगम के अफसरों ने इन आदेशों को हवा में उड़ाते हुए 26 मई को फर्म को अंतिम स्वीकृति दे दी। डीएलबी के पत्र के बावजूद कोई जांच नहीं की गई।
टेंडर में किए गए बड़े बदलाव और विसंगतियां
- 2 साल अटकी फाइल, फिर अचानक टेंडर: 4 फरवरी 2023 की साधारण सभा में टेंडर प्रस्ताव लिया गया था, लेकिन 2 साल तक फाइल नहीं चली। 18 फरवरी 2025 को तत्कालीन हेल्थ ऑफिसर ऋचा गौतम की नोटशीट के बाद उसी दिन नए टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
- शर्तों में बदलाव: चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए अंतिम तारीख को 16 अप्रैल करके 14 शर्तों में बदलाव किया गया। 7 साल के अनुभव की शर्त को बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया और एमआरएफ मशीनों के अनुभव की शर्त हटा ली गई।
- निगम के खर्चे पर गाड़ियां: 28 करोड़ रुपये खर्च करके निगम ने 210 टीपर खरीदे और कचरा कलेक्शन के लिए कंपनी को दे दिए।
नियमों में दोहरा मापदंड (Double Standards)
निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि वर्ष 2024 में दशहरा मेला परिसर में 40 बीट श्रमिकों के शौचालयों की सफाई के महज 4 लाख रुपये के टेंडर में ‘मैसर्स मिश्रा एंटरप्राइजेज’ को तकनीकी बिड से इसलिए बाहर कर दिया गया था क्योंकि उसे नैनवां (बूंदी) नगर पालिका ने ब्लैक लिस्ट किया था। लेकिन 123 करोड़ के टेंडर में डीबार फर्म पर मेहरबानी दिखाई गई।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
- अनिल अग्रवाल (संभागीय आयुक्त एवं प्रशासक, नगर निगम): “फर्म अगर डीबार है तो इस तथ्य को छुपा नहीं सकती। टेंडर लेते समय शपथ पत्र में जिक्र करना अनिवार्य है। इस मामले की जांच करवाते हैं। जांच के बाद एक्शन लिया जाएगा।”
- अशोक शर्मा (आयुक्त, नगर परिषद झालावाड़): “फर्म को 2023 में तीन साल के लिए डीबार किया था। इसकी सूचना निगम को भी भेजी हुई है।”
- जतिनपाल सिंह (डायरेक्टर, मैसर्स सुखपाल सिंह कंस्ट्रक्शन): “फर्म झालावाड़ के अलावा कहीं पर भी टेंडर में भाग ले सकती है। इसमें झूठा शपथ पत्र जैसी बात नहीं है।”
