मणिशंकर अय्यर का ‘विवादित बयान’ कानोड़िया कॉलेज को पड़ा भारी! 5 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच, 72 घंटे में होगी बड़ी कार्रवाई?

By Admin

जयपुर: राजधानी के प्रतिष्ठित कानोड़िया महिला पी.जी. महाविद्यालय में आखिर ऐसा क्या हुआ कि सरकार को रातों-रात उच्च स्तरीय जांच कमेटी बिठानी पड़ी? क्या यह केवल एक प्रशासनिक चूक है, या फिर हाल ही में हुए एक ‘विवादित कार्यक्रम’ का साइड इफेक्ट? आयुक्तालय, कॉलेज शिक्षा (राजस्थान) द्वारा जारी किए गए ताज़ा आदेश ने जयपुर के शिक्षा जगत में खलबली मचा दी है।

विवादों का ‘मणिशंकर अय्यर’ कनेक्शन!

‘Expose Now’ के सूत्रों के मुताबिक, यह जांच केवल कागजी कार्रवाई नहीं है। आपको याद दिला दें कि इसी कॉलेज परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने शिरकत की थी। वहां उन्होंने एक बेहद विवादित बयान दिया था, जिससे न केवल राजनीतिक गलियारों में, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी एक बड़ा सियासी बवाल खड़ा हो गया था। अब सरकार उन सभी कड़ियों को जोड़ने की तैयारी में है, जो इस कार्यक्रम को कॉलेज प्रशासन से जोड़ती हैं।

जांच का मुख्य केंद्र यह है कि क्या उस कार्यक्रम की आड़ में कॉलेज प्रशासन और प्रबंध समिति ने तय नियमों की अनदेखी की? क्या कैंपस के भीतर अनुशासन की धज्जियां उड़ाई गईं? इन सवालों के जवाब अब फाइलों से बाहर आने वाले हैं।

जांच के दायरे में कौन-कौन? 4 बड़े मोर्चों पर होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

आयुक्त ओम प्रकाश बैरवा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह जांच समिति कॉलेज की हर गतिविधि को बारीकी से खंगालेगी। अब इन 4 बड़े मोर्चों पर सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी है:

  1. शैक्षणिक गतिविधियां: पढ़ाई के नाम पर कॉलेज कैंपस में क्या परोसा जा रहा है? शैक्षणिक माहौल कैसा है?
  2. महाविद्यालय प्रशासन: क्या कॉलेज प्रशासन और प्रबंध समिति के बीच कोई ‘गुपचुप’ सांठगांठ है?
  3. प्रबंध समिति (Management): कॉलेज चलाने वाली प्रबंध समिति की कार्यप्रणाली की पूरी कुंडली खंगाली जाएगी।
  4. अनुशासन व्यवस्था: सबसे अहम सवाल—मणिशंकर अय्यर जैसे विवादित बयानों वाले व्यक्ति के कार्यक्रमों को मंजूरी देने के पीछे अनुशासन का क्या पैमाना था?

3 दिन का अल्टीमेटम: ‘भारी’ अधिकारियों की टीम तैनात

सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

सरकार ने इस जांच को ‘टॉप प्रायोरिटी’ (शीर्ष प्राथमिकता) पर रखा है। जांच की कमान ‘भारी’ अधिकारियों की टीम को सौंपी गई है। प्रो. अनिल खण्डेलवाल (प्राचार्य, राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट्स) को इस उच्च स्तरीय कमेटी का संयोजक बनाया गया है। उनके साथ शिक्षा विभाग के 4 अन्य अनुभवी अधिकारियों को सदस्य के तौर पर जोड़ा गया है।

Expose Now की पड़ताल के मुताबिक, इस कमेटी को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए मात्र 3 कार्य दिवस (72 घंटे) का समय दिया गया है। यानी अगले 3 दिनों में कानोड़िया कॉलेज के कई पुराने और गुप्त ‘राज’ फाइलों से बाहर आने वाले हैं।

सत्ता के गलियारों तक पहुँची आंच: कॉलेज मैनेजमेंट पर लटकी तलवार

इस सरकारी आदेश की कॉपी सीधे उप-मुख्यमंत्री (उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग) और अतिरिक्त मुख्य सचिव के दफ्तर तक भेजी गई है। इससे साफ़ संकेत मिलता है कि सरकार इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रही है और कॉलेज प्रबंधन अब किसी भी कीमत पर बच नहीं पाएगा। जयपुर के शिक्षा जगत में चर्चा गर्म है कि क्या इस जांच के बाद कॉलेज के मैनेजमेंट को भंग कर दिया जाएगा? या फिर कॉलेज प्रशासन के कुछ बड़े चेहरों की छुट्टी होगी?

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