जयपुर | राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) में हुए हजारों करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार मामले में मंगलवार को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एसीबी द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने 17 फरवरी 2026 की अल सुबह जयपुर, बाड़मेर, उदयपुर, करौली और दिल्ली समेत कई राज्यों में एक साथ छापेमारी कर जलदाय विभाग (PHED) के 9 वरिष्ठ अधिकारियों और इंजीनियरों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में वर्तमान मुख्य अभियंता, वित्तीय सलाहकार और सेवानिवृत्त अधिकारी शामिल हैं।
इन 9 बड़े चेहरों पर कसा शिकंजा
एसीबी ने जिन अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, उनमें दिनेश गोयल (मुख्य अभियंता प्रशासन), के.डी. गुप्ता (मुख्य अभियंता ग्रामीण), शुभांशु दीक्षित (तत्कालीन सचिव RWSSMB, हाल अतिरिक्त मुख्य अभियंता जयपुर-द्वितीय), सुशील शर्मा (हाल वित्तीय सलाहकार, अक्षय ऊर्जा), निरिल कुमार (हाल अतिरिक्त मुख्य अभियंता, प्रोजेक्ट चूरू), विशाल सक्सेना (निलंबित अधिशाषी अभियंता), अरुण श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता), डी.के. गौड़ (सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता) और महेन्द्र प्रकाश सोनी (सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता) शामिल हैं।








फर्जी सर्टिफिकेट से हथियाए 960 करोड़ के टेंडर
एसीबी के अनुसंधान में सामने आया है कि फर्म मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवैल कंपनी (प्रोपराइटर महेश मित्तल) और फर्म मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवैल कंपनी (प्रोपराइटर पदमचंद जैन) ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड (IRCON) के फर्जी ‘कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र’ तैयार किए। इन फर्जी दस्तावेजों की मदद से और उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से इन फर्मों ने करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल कर लिए।
‘साइट विजिट’ के नाम पर खेल, हजारों करोड़ का चूना
जांच में एक और बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। पीएचईडी के उच्च अधिकारियों ने आपराधिक मंशा से 50 करोड़ रुपये से ऊपर के बड़े प्रोजेक्ट्स (Major Projects) की निविदाओं में नियमों के विरुद्ध ‘साइट विजिट प्रमाण-पत्र’ की बाध्यता जोड़ दी। इसका मकसद बोलीदाताओं (Bidders) की पहचान उजागर करना और ‘टेंडर पूलिंग’ करना था। इसके चलते अप्रत्याशित रूप से ऊंचे प्रीमियम पर टेंडर जारी किए गए, जिसका अधिकारियों ने अनुमोदन भी कर दिया। इस प्रक्रिया से सरकारी खजाने को हजारों करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
SIT की गहन जांच के बाद कार्रवाई
एसीबी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया, जिसके बाद यह गिरफ्तारी की गई। इससे पहले भी एसीबी ने प्रकरण संख्या 215/2023 में 11 आरोपियों और 2 फर्मों के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। वर्तमान कार्रवाई एडीजी स्मिता श्रीवास्तव के सुपरविजन और आईजी राजेश सिंह व डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के निर्देशन में की गई है। अभी भी आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच का दायरा बढ़ सकता है।
