खास रिपोर्ट: ‘Expose Now’ इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो…
जयपुर। राजधानी जयपुर की लाइफलाइन कहा जाने वाला सिंधी कैंप बस स्टैंड आज जनता के लिए परेशानी का सबब बन चुका है। Expose Now की विशेष पड़ताल में यह कड़वा सच सामने आया है कि सिंधी कैंप पर बसों के भारी ओवरलोड और अनियंत्रित संचालन के कारण मुख्य मार्ग चौबीसों घंटे जाम की गिरफ्त में रहता है । गृह विभाग ने भी माना है कि रोडवेज और निजी बसों की अत्यधिक संख्या के कारण इस इलाके में यातायात का भारी दबाव बना रहता है ।

इन्वेस्टिगेशन: 11 साल पुरानी योजना, फिर भी ढाक के तीन पात!
Expose Now के पास मौजूद आधिकारिक दस्तावेज बताते हैं कि सिंधी कैंप का दबाव कम करने के लिए ‘राजस्थान राज्य बस टर्मिनल विकास प्राधिकरण’ का गठन तो 27 अप्रैल 2015 को ही कर दिया गया था । लेकिन 11 साल बीत जाने के बाद भी यह प्राधिकरण केवल कागजी घोड़े दौड़ाने तक सीमित है।
प्राधिकरण का गठन: अधिनियम 2015 के तहत 27 अप्रैल 2015 को ही हो गया था ।
लक्ष्य: शहर के चारों दिशाओं में नए बस स्टैंड बनाकर बसों की शहर में एंट्री रोकना ।
हकीकत: एक दशक बीतने को है, लेकिन आज भी सिंधी कैंप पर दबाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
इन्वेस्टिगेशन: फाइलों में दौड़ रही बसें, सड़कों पर रेंगती जनता
सरकार ने शहर में बसों की एंट्री रोकने के लिए चारों दिशाओं में बस स्टैंड बनाने का निर्णय लिया गया था । लेकिन आज की हकीकत यह है कि न तो शहर में बसों की एंट्री रुकी है और न ही जनता को जाम से मुक्ति मिली है ।
Exclusive: कहाँ अटकी हैं करोड़ों की योजनाएं?
जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने बस स्टैंड्स के लिए चारों दिशाओं में जमीनें तो आवंटित कर दी हैं, लेकिन Expose Now की पड़ताल पूछती है कि वहां आज तक ईंट क्यों नहीं लगी?
- लोकेशन आवंटित भूमि का विवरण ग्राउंड स्टेटस
- दिल्ली रोड
- साईन्स टेक सिटी, अचरोल
- केवल फाइलों में ‘प्रक्रियाधीन’
- टोंक रोड
- शिवदासपुरा, रिंग रोड योजना
- निर्माण का कोई नामोनिशान नहीं
- आगरा रोड
- कानोता, JDA योजना
- धरातल पर सन्नाटा
- अजमेर रोड
- वेस्ट वे हाईट योजना
जाम की जिम्मेदारी किसकी?

सिस्टम की सुस्ती को बेनकाब कर दिया है । यातायात पुलिस का जाब्ता तैनात करके ‘ट्रैफिक सुचारू’ करने का दावा तो किया जाता है, लेकिन हकीकत में सिंधी कैंप की सड़कों पर रेंगते वाहन विभाग की विफलता की कहानी कह रहे हैं। सिंधी कैंप की यह बदहाली सिर्फ एक जाम की समस्या नहीं है, बल्कि यह सिस्टम की ‘इच्छाशक्ति’ की कमी का बड़ा प्रमाण है। करोड़ों की जमीनें आवंटित होने के बावजूद बस टर्मिनल्स का न बनना जनता के टैक्स के पैसे और उनके समय की बर्बादी है।
Expose Now का तीखा सवाल: ‘प्रक्रियाधीन’ का खेल कब तक?
जब सरकार से पूछा गया कि इन चिन्हित स्थानों पर बस स्टैंड कब तक बनेंगे, तो जवाब वही पुराना मिला—”क्रियान्विति हेतु कार्यवाही प्रक्रियाधीन है” । सरकार ने भूमि आवंटन की बात तो मान ली है, लेकिन निर्माण कार्य कब शुरू होगा और कब जनता को सिंधी कैंप के नारकीय जाम से मुक्ति मिलेगी, इस पर कोई समय सीमा (Deadline) तय नहीं की गई है । जब जमीन मिल चुकी है और प्राधिकरण बन चुका है, तो फिर राजधानी को जाम में क्यों झोंका जा रहा है?
