जयपुर। राजस्थान की राजधानी में नगर निगम की ओर से यूडी टैक्स (Urban Development Tax) वसूली को लेकर अधिकारियों की भारी मनमानी और तानाशाही के मामले सामने आ रहे हैं। आरोप है कि निगम अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना के मकानों पर नोटिस चस्पा कर रहे हैं, जिनमें न तो संपत्ति का सही क्षेत्रफल दर्शाया जा रहा है और न ही टैक्स की स्पष्ट गणना दी जा रही है। इस कार्रवाई से शहर के निवासियों में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
केस-1: कृषि भूमि पर 27 लाख का बकाया, गणना का अता-पता नहीं
मुरलीपुरा जोन का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ साधुराम गुर्जर को फरवरी में करीब 14 लाख रुपये यूडी टैक्स जमा कराने का नोटिस दिया गया था। महज एक महीने बाद, 12 मार्च को नया नोटिस जारी कर बकाया राशि को सीधे बढ़ाकर 27 लाख रुपये कर दिया गया। गुर्जर का कहना है कि टैक्स 2007 से बकाया बताया गया है, जबकि 2022 तक उक्त जमीन पर कृषि कार्य हो रहा था। नोटिस में संपत्ति का क्षेत्रफल तक दर्ज नहीं है।
केस-2: 18 लाख के फेर में 30 हजार पौधों वाली नर्सरी सील
जगतपुरा और झालाना जोन के अधिकारियों ने सिद्धार्थ नगर स्थित एक नर्सरी पर 18 लाख रुपये का टैक्स बकाया निकालकर उसे सील कर दिया है। इस कार्रवाई के कारण नर्सरी में मौजूद करीब 30 हजार पौधे पानी न मिलने के कारण सूखने की कगार पर हैं। नर्सरी संचालक के अनुसार, पिछले चार दिनों से सिंचाई बंद है।
जनता की शिकायत: पारदर्शिता का अभाव
मकान मालिकों का कहना है कि निगम अधिकारी नियमों की अनदेखी कर केवल वसूली के नाम पर ‘दादागिरी’ कर रहे हैं। कई मामलों में 15 से 18 साल पुराना बकाया निकाला जा रहा है, वह भी उस अवधि का जब जमीन कृषि श्रेणी में थी। इतना ही नहीं, कुछ ही महीनों के अंतराल में टैक्स की राशि को दोगुना कर नया नोटिस थमा दिया जाता है।
मंत्री की फटकार का भी असर नहीं
उल्लेखनीय है कि यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा स्वयं अवैध नोटिसों और अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए फटकार लगा चुके हैं। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर अधिकारियों की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं दिख रहा है और जनता की सुनवाई नहीं हो रही है।
