जयपुर: राजस्थान के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री संजय शर्मा ने मंगलवार को शासन सचिवालय में विभागीय समीक्षा बैठक ली। बैठक का मुख्य फोकस बजट घोषणाओं का समय पर क्रियान्वयन, अनुसंधान (Research) को बढ़ावा देना और विभाग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना रहा।
शोध और पेटेंट पर विशेष जोर
मंत्री संजय शर्मा ने निर्देश दिए कि विभाग को उद्योगों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर शोध प्रस्ताव (Research Proposals) आमंत्रित करने चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिया:
- पेटेंट प्रक्रिया: अनुसंधान को केवल कागजों तक सीमित न रखकर उसे पेटेंट प्रक्रिया से जोड़ा जाए।
- फंडिंग का नया स्रोत: R&D परियोजनाओं के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग के CSR और CAMPA फंड का उपयोग करने के निर्देश दिए।
विज्ञान केंद्रों का विस्तार: जोधपुर और अलवर पर फोकस
प्रदेश में विज्ञान के प्रचार-प्रसार के लिए कई बड़े निर्णय लिए गए:
- इनोवेशन हब: जोधपुर में ‘इनोवेशन हब’ का कार्य शीघ्र शुरू करने के निर्देश।
- अलवर मॉडल: अलवर जिले को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है, जहाँ जिला स्तर पर राज्य वित्त पोषित विज्ञान केंद्रों के विस्तार का नया मॉडल तैयार किया जाएगा।
- नए केंद्र: कोटा, बीकानेर और अजमेर में निर्माणाधीन विज्ञान केंद्रों के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।
तकनीक और संसाधन प्रबंधन
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए मंत्री ने निम्नलिखित बिंदुओं पर बल दिया:
- GIS डेटा का उपयोग: जोधपुर स्थित ‘सरसेक’ (SRSAC) द्वारा तैयार जीआईएस डेटा का उपयोग राजस्व और वन विभाग के डिजिटल मानचित्रण (Mapping) में किया जाएगा।
- संसाधनों की उपलब्धता: संभाग स्तर के अधिकारियों को वाहन, कंप्यूटर और बेहतर कार्यालय सुविधाएं दी जाएंगी ताकि वे जिलों में योजनाओं की प्रभावी निगरानी कर सकें।
- रिक्त पद: विभाग में रिक्त पदों को जल्द भरने और जरूरत पड़ने पर संविदा कार्मिकों की नियुक्ति के निर्देश दिए गए।
बैठक में विभाग के सचिव वे. सरवन कुमार ने बजट घोषणाओं की वर्तमान स्थिति साझा की, जबकि परियोजना निदेशक राजीव जैन ने पीपीटी के माध्यम से विभागीय योजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।
