नई दिल्ली, देश भर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों को लेकर चल रहे विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने यूजीसी नियम 2026 के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले की पूरी सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक 2012 के पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 5 मुख्य बिंदु
- याचिकाकर्ताओं की दलील: सुप्रीम कोर्ट में वकील विनीत जिंदल, मृत्युंजय तिवारी और अन्य द्वारा दायर तीन याचिकाओं पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि नए नियम भेदभाव खत्म करने के बजाय सामान्य वर्ग के खिलाफ जातिगत भेदभाव को और बढ़ावा देने वाले हैं।
- विशेष बेंच की सुनवाई: मामले की गंभीरता को देखते हुए CJI सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने माना कि नए नियमों के प्रावधानों का दुरुपयोग होने की प्रबल संभावना है।
- CJI की कड़ी टिप्पणी: सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने समाज में संभावित विभाजन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “यदि कोर्ट इस स्तर पर दखल नहीं देता है, तो इससे समाज में जो विभाजन पैदा होगा, उसके नतीजे बेहद खतरनाक हो सकते हैं।”
- केंद्र और UGC को नोटिस: कोर्ट ने नए नियमों पर रोक लगाने के साथ ही केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि इन नियमों को लागू करने का तार्किक आधार क्या है।
- अगली सुनवाई तक यथास्थिति: मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की गई है। तब तक के लिए देश के सभी विश्वविद्यालयों में 2012 के यूजीसी रेगुलेशन ही लागू रहेंगे।
सुनवाई के दौरान उठा ‘क्षेत्रीय और जातिगत’ सुरक्षा का सवाल
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया। उन्होंने पूछा कि यदि दक्षिण भारत का कोई छात्र उत्तर भारत के किसी कॉलेज में पढ़ने आता है और वहां उसकी जाति के बारे में किसी को पता न हो, तो क्या यह नया कानून उसे किसी भी तरह की सुरक्षा प्रदान करता है? कोर्ट का इशारा नियमों की अस्पष्टता और उनके जटिल प्रभावों की ओर था।
क्या था विवाद का मुख्य कारण?
यूजीसी द्वारा साल 2026 की शुरुआत में लाए गए इन नियमों का छात्र संगठन और कई शिक्षाविद विरोध कर रहे थे। विरोधियों का मानना था कि ये नियम उच्च शिक्षा में प्रशासनिक दखल बढ़ाते हैं और जातिगत आधार पर समाज को बांटने का काम कर सकते हैं। आज के स्टे (Stay) के बाद अब शिक्षण संस्थानों में दाखिले और नियुक्तियों को लेकर पैदा हुआ संशय फिलहाल थम गया है।
