Dholpur News: शिवरात्रि से पहले धौलपुर में दिखा ‘चमत्कार’? कोबरा को ‘भोले का रूप’ मानकर पूज रहे लोग, वन विभाग ने दी चेतावनी

धौलपुर: महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का पावन पर्व नजदीक आते ही धौलपुर जिले के राजाखेड़ा में आस्था का एक अनोखा और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां सड़क किनारे पिछले 25 दिनों से एक कोबरा सांप (Cobra Snake) ने डेरा जमा रखा है। चूंकि शिवरात्रि का त्यौहार पास है, इसलिए ग्रामीणों ने इस जहरीले सांप को साधारण जीव न मानकर ‘भोलेनाथ का चमत्कार’ मान लिया है।

महाशिवरात्रि के चलते बढ़ी आस्था, शुरू हुए भजन-कीर्तन

राजाखेड़ा से करीब 7 किलोमीटर दूर कांटरपुरा-कसियापुरा रोड पर यह कोबरा पिछले करीब एक महीने से रोजाना एक ही जगह पर आकर घंटों बैठता है।

  • भोले का रूप: ग्रामीणों का कहना है कि महाशिवरात्रि आने वाली है और ऐसे समय में नाग देवता का इस तरह दर्शन देना कोई संयोग नहीं, बल्कि साक्षात शिवजी का आशीर्वाद है।
  • भक्ति का माहौल: सांप को प्रसन्न करने के लिए ग्रामीणों ने वहां ढोलक-मंजीरों के साथ भजन-कीर्तन शुरू कर दिए हैं। लोग इसे ‘भोले का रूप’ मानकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

रोजाना 4 घंटे देता है ‘दर्शन’

ग्रामीण रामेश्वर और बहादुर सिंह ने बताया कि यह कोबरा रोजाना सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक (करीब 4 घंटे) सड़क किनारे एक ही जगह पर बैठता है। भीड़भाड़ और शोर-शराबे के बावजूद वह अपनी जगह से नहीं हिलता और न ही किसी को नुकसान पहुंचाता है। इसी शांत स्वभाव को देखकर ग्रामीणों की आस्था और गहरी हो गई है।

वन विभाग की चेतावनी: यह ‘चमत्कार’ नहीं, मौत को दावत है

जहां एक तरफ पूरा गांव शिव भक्ति में लीन होकर सांप के पास जा रहा है, वहीं वन विभाग ने इसे जानलेवा खतरा बताया है। वन्य जीव रेस्क्यू प्रभारी (धौलपुर) राधा कृष्ण शर्मा ने स्पष्ट किया:

  • अंधविश्वास: यह कोई दैवीय चमत्कार नहीं, बल्कि कोरा अंधविश्वास है।
  • वैज्ञानिक कारण: फरवरी का महीना सांपों का ‘मेटिंग पीरियड’ (प्रजनन काल) होता है। इसके अलावा, ठंड में अपनी बॉडी के टेम्परेचर को मेंटेन करने के लिए सांप धूप सेंकने बाहर निकलते हैं।
  • खतरा: यह कोबरा अत्यंत जहरीला है। अगर इसने किसी श्रद्धालु को डस लिया और 2 घंटे में इलाज नहीं मिला, तो मौत निश्चित है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि आस्था के नाम पर जान जोखिम में न डालें और सांप से उचित दूरी बनाए रखें।
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