जयपुर: राजस्थान के दौसा में तहसीलदार और स्थानीय विधायक के बीच चल रहा विवाद अब एक नया और गंभीर मोड़ ले चुका है। दौसा (119) से विधायक दीनदयाल बैरवा ने 26 फरवरी 2026 को राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष को एक लिखित पत्र सौंपा है। इस पत्र में विधायक ने दौसा के तहसीलदार गजानंद मीणा पर विधानसभा की गरिमा का मज़ाक बनाने और अध्यक्ष के निर्णय की धज्जियां उड़ाने का गंभीर आरोप लगाया है। यह पूरा विवाद तहसीलदार द्वारा की गई एक फेसबुक पोस्ट के बाद गरमाया है, जिसमें उन्होंने सदन में मांगी गई माफी को लेकर अपनी सफाई दी थी।
‘माफी वाफी कुछ नहीं…’ पोस्ट से गरमाया मुद्दा

विधायक द्वारा स्पीकर को दी गई शिकायत के अनुसार, 24 फरवरी 2026 को विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में तहसीलदार का वह पत्र पढ़कर सुनाया था जिसमें उन्होंने अपना जुर्म कबूल किया था और माफी मांगी थी। सदन में पक्ष और विपक्ष के सभी विधायकों ने अध्यक्ष के इस कदम का स्वागत किया था। लेकिन इसके ठीक अगले दिन यानी 25 फरवरी को तहसीलदार गजानंद मीणा ने अपनी फेसबुक आईडी से एक पोस्ट किया। इस पोस्ट में तहसीलदार ने लिखा, “माफ़ी वाफ़ी कुछ नहीं मैंने केवल खेद प्रकट किया था वो भी माननीय विधानसभा अध्यक्ष महोदय से”।
2 फरवरी को मकान तोड़ने के दौरान हुआ था विवाद
विधायक दीनदयाल बैरवा ने अपने पत्र में विवाद की जड़ का भी जिक्र किया है। पत्र के अनुसार, 2 फरवरी 2026 को तहसीलदार गजानंद मीणा दौसा में कुछ गरीबों के मकान तोड़ रहे थे। जब विधायक वहां पहुंचे और इस कार्यवाही की जानकारी मांगी, तो तहसीलदार उनसे उलझ गए। विधायक का आरोप है कि तहसीलदार ने खुद को जमीन का मालिक बताया और उन्हें धमकी भरे अंदाज में वहां से चले जाने को कहा। इसी घटना की शिकायत विधायक ने सदन में उठाई थी, जिस पर स्पीकर ने प्रसंज्ञान लेते हुए तहसीलदार को तलब किया था।
सदन की गरिमा को ठेस, उच्चस्तरीय जांच की मांग
विधायक बैरवा ने अपने पत्र में कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि तहसीलदार के इस फेसबुक पोस्ट से सदन की गरिमा को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने लिखा है कि तहसीलदार द्वारा सार्वजनिक रूप से फेसबुक पर स्पीकर के फैसले को चुनौती देने से वे और उनके साथी विधायक स्तब्ध और दुखी हैं। पत्र के अंत में विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष से इस पूरे मामले और तहसीलदार के आचरण की एक उच्चस्तरीय जांच करवाने का कड़ा अनुरोध किया है।
