विधानसभा में गूँजा दूषित जल का मुद्दा: चम्बल में गिर रहा 14 नालों का गंदा पानी, मोरेल बांध में केमिकल से खेती और सेहत पर संकट

राजस्थान विधानसभा में आज प्रदेश की जीवनदायिनी मानी जाने वाली नदियों और बांधों में बढ़ते प्रदूषण पर तीखी चर्चा हुई। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही ओर से जल स्रोतों की बदहाली और प्रभावी ट्रीटमेंट सिस्टम की कमी पर चिंता जताई गई।

चम्बल नदी: घड़ियाल सेंचुरी और सेहत को खतरा

भाजपा विधायक संदीप शर्मा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए कोटा शहर की स्थिति बयां की। उन्होंने बताया कि कोटा के 14 से अधिक बड़े नालों का गंदा पानी बिना किसी शोधन (Treatment) के सीधे चम्बल नदी में डाला जा रहा है।

  • प्रभाव: इससे चम्बल की प्रसिद्ध ‘घड़ियाल सेंचुरी’ के जीवों और आमजन के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
  • मांग: एनजीटी (NGT) के आदेशों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। सभी नालों को तत्काल सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जोड़ने की मांग की गई है।

मोरेल बांध: केमिकल युक्त पानी से फसलें बर्बाद

वहीं, कांग्रेस विधायक इंदिरा मीणा ने मोरेल बांध में मिल रहे जहरीले रसायनों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि केमिकल युक्त पानी के कारण दौसा, सवाई माधोपुर और लालसोट क्षेत्र के गांवों की खेती बुरी तरह प्रभावित हो रही है। दूषित पानी से फसलों की गुणवत्ता गिर रही है और ग्रामीण इलाकों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

सदन में कम उपस्थिति पर अध्यक्ष नाराज

चर्चा के दौरान सदन में सदस्यों की कम संख्या को देखकर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने नाराजगी जताई। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों से प्रश्नकाल और चर्चा के दौरान पूरी संख्या में रहने की अपील की ताकि जनहित के मुद्दों पर सार्थक संवाद हो सके।

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