लव लाइफ और मैरिज में बार-बार आ रही है परेशानी? हो सकता है कुंडली में यह ‘ग्रह दोष’

Love Life में बार-बार परेशानी यानि कुंडली के ग्रह दोष

आज के समय में यदि आपकी भी लव लाइफ या मैरिज फेल हो रही है या फिर आपसी सामंजस्य में तनाव बढ़ता जा रहा है या फिर अलग होने तक की स्थिति आ रही है तो इसमें आपकी कुंडली के ग्रह योगों की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। आज बहुत से लोग इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका रिश्ता बार-बार टूट जाता है, प्रेम में धोखा मिलता है, शादी की बात बनते-बनते बिगड़ जाती है या फिर रिश्ते में हर समय तनाव बना रहता है। कई बार व्यक्ति अपनी पूरी कोशिश करता है, फिर भी प्रेम जीवन में स्थिरता नहीं आ पाती।

आज हम जानेंगे कि कुंडली में बने कौनसे खराब ग्रह योग आपकी लव लाइफ और वैवाहिक जीवन में तनाव, प्रेम और विश्वास की कमी के साथ ही आपके अलगाव की स्थिति भी ला सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र में पंचम भाव प्रेम का और सप्तम भाव वैवाहिक जीवन का है। इसी प्रकार से शुक्र विवाह को और चंद्रमा मानसिक स्थिरता को दर्शाता है।

लव लाइफ और मैरिज में परेशानी देने वाले प्रमुख ग्रह और योग

शुक्र दोष कुंडली में शुक्र ग्रह प्रेम, आकर्षण और वैवाहिक जीवन का कारक ग्रह है। जब शुक्र ग्रह अपनी नीच राशि यानि कन्या राशि में हो अथवा शुक्र ग्रह शनि, राहु, केतु या फिर मंगल ग्रह से पीड़ित हो, इसी प्रकार से जब शुक्र ग्रह पाप ग्रहों के साथ में लग्न से 6,8 या 12वें भाव में बैठा हो तो ऐसी स्थिति में प्रेम संबंधों में स्थिरता की कमी, ब्रेकअप और भ्रम की स्थिति देखने को मिलती है। यदि शुक्र के साथ राहु की युति पंचम अथवा सप्तम भाव में बनती है तो व्यक्ति के अन्यत्र और असामान्य प्रेम संबंध अथवा प्रेम में धोखे की संभावना भी बनी रहती है। शुक्र ग्रह दोष के समाधान के लिए ओपल रत्नों से युक्त शुक्र ग्रह के हस्त निर्मित वैदिक यंत्र को पूजा घर अथवा घर के अग्नि कोण में अवश्य ही स्थापित करना चाहिए।

चंद्र दोषकुंडली में जब चंद्र ग्रह राहु अथवा केतु के साथ में युति करके ग्रहण योग बनाता है तो व्यक्ति के अंदर मानसिक स्थिरता की कमी, गलत निर्णय, प्रेम में भ्रम की स्थिति भी अक्सर देखने को मिलती है। कुंडली में जब चंद्र ग्रह सूर्य के साथ में स्थित होकर पंचम भाव अथवा सप्तम भाव में अमावस्या योग का निर्माण करता है तो ऐसे में भी प्रेम और वैवाहिक जीवन में तनाव या अलगाव देखने को मिल सकता है। चंद्र ग्रह दोष के समाधान हेतु मोती रत्नों से युक्त चंद्र ग्रह का हस्त निर्मित वैदिक यंत्र पूजा घर अथवा घर के वायव्य कोण में अवश्य ही स्थापित करना चाहिए।

गुरु दोष– कुंडली में गुरु ग्रह संतान का कारक एवं स्त्रियों के लिए पति का कारक ग्रह है। जब यह गुरु ग्रह अपनी नीच राशि अथवा राहु ग्रह से पीड़ित होता है तो व्यक्ति के जीवन में प्रेम को लेकर अस्थिरता के साथ ही चरित्र एवं पारिवारिक सुख में भी कमी देखने को मिलती है। गुरु ग्रह दोष के समाधान हेतु सुनहला रत्नों से युक्त गुरु का हस्त निर्मित वैदिक यंत्र पूजा घर अथवा घर के ईशान कोण में अवश्य स्थापित करना चाहिए।

मंगल दोषकुंडली में जब मांगलिक दोष बना हो और मंगल पाप ग्रहों से युक्त अथवा दृष्ट हो या फिर नीच राशि का मंगल लग्न, चतुर्थ या सप्तम भाव में स्थित हो तो ऐसी स्थिति में भी वैवाहिक जीवन में परेशानी, क्रोध और अलगाव की स्थिति देखने को मिल सकती है। मंगल दोष समाधान के लिए मूंगा रत्नों से युक्त मंगल ग्रह का हस्त निर्मित वैदिक यंत्र पूजाघर या फिर घर की दक्षिण दिशा में अवश्य स्थापित करना चाहिए।

कौनकौन से ग्रह योग Love Life में परेशानी बढ़ा सकते हैं?

शुक्र-राहु योग

शुक्र-केतु योग

मंगल दोष

ग्रहण योग (विशेषकर चंद्र-राहु)

शनि की दृष्टि पंचम या सप्तम भाव पर

राहु या केतु का पंचम अथवा सप्तम भाव में होना

पंचमेश या सप्तमेश का अशुभ ग्रहों से पीड़ित होना

इन योगों का प्रभाव प्रत्येक कुंडली में अलग-अलग होता है। इसलिए केवल एक योग देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में केवल व्यक्ति का स्वभाव ही नहीं, बल्कि उसकी जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति, भावों की दशा, ग्रहों की दृष्टि, दशा-अंतर्दशा और गोचर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले पूरी जन्मकुंडली का गहन विश्लेषण आवश्यक होता है। 

Note- यह लेख ज्योतिष के दृष्टिकोण पर आधारित है और ज्ञानवर्धन के उद्देश्य से लिखा गया है।


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