राजस्थान के इंग्लिश मीडियम स्कूलों में अब ‘योग्य’ शिक्षकों की होगी भर्ती

जयपुर: राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सोमवार को विधानसभा प्रश्नकाल के दौरान एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों (अंग्रेजी माध्यम) में अब केवल साक्षात्कार (Interview) के माध्यम से योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बड़ी संख्या में स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में तो बदल दिया गया, लेकिन वहां पढ़ाने के लिए शिक्षकों के पद ही सृजित नहीं किए गए थे।

पिछली सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल ।

विधायक महंत बालकनाथ द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए दिलावर ने बताया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में कुल 3,737 विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में रूपांतरित किया गया था। अकेले लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में 203 स्कूल बदले गए, लेकिन वहां शिक्षकों की उचित व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि कई स्थानों पर ऐसे शिक्षक लगा दिए गए जो स्वयं अंग्रेजी माध्यम से शिक्षित नहीं थे, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हुई।


राजस्थान में अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों की वर्तमान स्थिति (Table)

विद्यालय का प्रकारकुल संख्यावर्तमान स्थिति
महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (MGGS)3,737पद सृजन और भर्ती प्रक्रिया जारी
स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल134सुचारू रूप से संचालित
शिक्षक चयन प्रक्रियासाक्षात्कार (Interview)योग्य शिक्षकों की प्राथमिकता

कम नामांकन वाले स्कूलों पर गिरेगी गाज?

शिक्षा मंत्री ने सदन में यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में कई विद्यालय वर्तमान में संचालन की दृष्टि से ‘व्यवहार्य’ (Viable) नहीं रह गए हैं।

  • शून्य नामांकन: कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 10 से भी कम है, और कुछ स्थानों पर यह संख्या शून्य तक पहुँच गई है।
  • स्कूल बस सुविधा: वर्तमान में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए बस सेवा का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, मंत्री ने आश्वासन दिया कि यदि इस संबंध में कोई ठोस प्रस्ताव प्राप्त होता है, तो सरकार उस पर विचार करने के लिए तैयार है।

भजनलाल सरकार का संकल्प: सुव्यवस्थित शिक्षा व्यवस्था ।

शिक्षा मंत्री ने विश्वास दिलाया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार आवश्यकतानुसार नए पद सृजित कर रही है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना है ताकि सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी निजी स्कूलों के समान गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी शिक्षा मिल सके।

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