राजस्थान के चिकित्सा महकमे में एक बार फिर ईमानदारी और नैतिकता शर्मसार हुई है। ‘Expose Now’ की पड़ताल में सामने आया है कि जिन हाथों में मरीजों को जीवनदान देने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही सरकारी खजाने को 12.39 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। दौसा में सिलिकोसिस बीमारी के फर्जी सर्टिफिकेट जारी करने के आरोप में साइबर थाना पुलिस ने दो विशेषज्ञों (डॉक्टरों) और एक रेडियोग्राफर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
गिरफ्तारी का ‘ऑन-द-स्पॉट’ एक्शन
साइबर थाना प्रभारी बृजेश के अनुसार, सोमवार 30 मार्च 2026 की शाम करीब 7 बजे इस संगठित गिरोह के मुख्य किरदारों को दबोचा गया:
- डॉ. मनोज ऊंचवाल (चेस्ट-टीबी कनिष्ठ विशेषज्ञ)
- डॉ. डीएन शर्मा (प्रमुख विशेषज्ञ मेडिसिन)
- मनोहर लाल (वरिष्ठ रेडियोग्राफर)
1. एक X-Ray और 413 ‘चमत्कार’
जांच में जो फर्जीवाड़ा सामने आया है वह हैरान कर देने वाला है। इन अफ़सरों ने ‘ऑटो अप्रूवल’ प्रक्रिया का फायदा उठाते हुए एक ही मरीज के एक्स-रे को बार-बार अलग-अलग नामों से पोर्टल पर अपलोड किया।
- फर्जीवाड़ा: 413 फर्जी सर्टिफिकेट जारी किए गए।
- वसूली: पात्र न होते हुए भी लोगों ने सरकार से 12.39 करोड़ रुपये की सहायता राशि हड़प ली।
- हैरानी: जो असली मरीज थे, उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया और जो स्वस्थ थे, उन्हें ‘कागजों’ में बीमार बना दिया गया।
2. दौसा बना घोटाले का ‘एपिक सेंटर’
नवंबर 2022 में जब यह प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू हुई, तो दौसा में कार्ड बनने की बाढ़ आ गई। 10 महीने में ही 2453 कार्ड बना दिए गए, जो पूरे राजस्थान का लगभग 46 फीसदी था। इसी ‘अति-उत्साह’ ने सरकार को शक करने पर मजबूर किया और जब जांच कमेटी बैठी, तो विभाग के भीतर छिपे दीमक सामने आए।
लिस्ट: रडार पर आए 22 आरोपी अधिकारी/कर्मचारी
| जिला | पद | मुख्य आरोपी (जिन पर FIR दर्ज हुई) |
| दौसा | डॉक्टर/रेडियोग्राफर | डॉ. देवीनारायण, डॉ. घनश्याम, डॉ. बत्तीलाल, डॉ. मनोज, डॉ. प्रेम कुमार, डॉ. मुकेश |
| सीकर/जयपुर | डॉक्टर/रेडियोग्राफर | डॉ. प्रहलाद दायमा, डॉ. बाबूलाल बूरी, डॉ. मानप्रकाश शर्मा |
| अन्य जिले | रेडियोग्राफर | पिंकी धाकड़ (करौली), रिंकू यादव (भिवाड़ी), शरद कुमार (तिजारा) |
क्या है सिलिकोसिस और क्यों होता है यह खेल?
सिलिकोसिस फेफड़ों की एक लाइलाज बीमारी है जो खदानों में काम करने वाले श्रमिकों को धूल के कारण होती है। राजस्थान सरकार की 2019 की नीति के तहत इन मरीजों को भारी-भरकम सहायता दी जाती है:
- कार्ड बनने पर: 3 लाख रुपये की तत्काल सहायता।
- मृत्यु होने पर: परिवार को 2 लाख रुपये और अंतिम संस्कार के लिए 10 हजार रुपये।
- पेंशन: 1500 रुपये प्रति माह।
इसी ‘मोटी रकम’ के लालच में बिचौलियों, डॉक्टरों और रेडियोग्राफर्स ने मिलकर इस मानवीय योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया।
क्या है सिलिकोसिस और सरकार की नीति?
- बीमारी: यह फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जो खदानों या धूल भरे वातावरण में काम करने वाले श्रमिकों को होती है। सिलिका युक्त धूल सांस के जरिए फेफड़ों में जाने से उन्हें स्थायी नुकसान पहुँचाती है।
- सरकारी सहायता: 2019 की सिलिकोसिस नीति के तहत, पीड़ित श्रमिक को कार्ड बनने पर 3 लाख रुपये की सहायता दी जाती है।
- मृत्यु पर सहायता: मरीज की मौत होने पर परिवार को 2 लाख रुपये और अंतिम संस्कार के लिए 10 हजार रुपये मिलते हैं। इसके अलावा मरीज को 1500 रुपये प्रति माह पेंशन का भी प्रावधान है।
