बीकानेर। बीकानेर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, पीबीएम (PBM) में इलाज के अभाव और प्रशासनिक ढिलाई के चलते एक 20 वर्षीय युवक की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। मृतक भरत (सुभाषपुरा निवासी) की मौत के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और जांच कमेटी के गठन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे प्रकरण में सरकारी और निजी अस्पताल की दो अलग-अलग सोनोग्राफी रिपोर्टों ने डॉक्टरों की विशेषज्ञता और संवेदनशीलता को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
सोनोग्राफी रिपोर्टों का ‘खतरनाक’ अंतर
युवक की जांच के दौरान दो अस्पतालों की रिपोर्ट में जमीन-आसमान का फर्क देखने को मिला:
- पीबीएम अस्पताल की रिपोर्ट: पीबीएम की सोनोग्राफी में युवक की मूत्र प्रणाली (Urinary System) में अवरोध और बाईं किडनी में सूजन (Hydronephrosis) बताई गई थी।
- निजी अस्पताल की रिपोर्ट: जब परिजनों ने निजी अस्पताल में जांच कराई, तो वहां की रिपोर्ट में छोटी आंत में गंभीर रुकावट (Small Bowel Obstruction) और करीब 38 सेमी तक फैले हुए लूप्स (Loops) की संभावना जताई गई।
हैरानी की बात यह है कि निजी अस्पताल की इस गंभीर रिपोर्ट को लेकर जब युवक वापस पीबीएम के ट्रामा सेंटर पहुँचा, तो वरिष्ठ डॉक्टरों को बुलाने के बजाय ड्यूटी डॉक्टरों ने उसे फिर से यूरोलॉजी विभाग भेज दिया। करीब 7 घंटे तक युवक दर्द से तड़पता रहा और अंततः उसकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
युवक की मौत के बाद हुए पोस्टमार्टम में डॉक्टरों की लापरवाही के पुख्ता सबूत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, युवक की आंत में गैंग्रीन (Gangrene) बन गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निजी अस्पताल की रिपोर्ट को समय रहते गंभीरता से लिया जाता और तत्काल सर्जरी की जाती, तो युवक की जान बचाई जा सकती थी।
जांच कमेटी के गठन में भी ‘खेला’, अब रेडियोलॉजिस्ट शामिल
इस मामले की जांच के लिए गठित कमेटी भी विवादों में है। कमेटी में पहले किसी भी रेडियोलॉजिस्ट को शामिल नहीं किया गया था, जबकि पूरा विवाद ही सोनोग्राफी रिपोर्ट के गलत होने से शुरू हुआ था। अब चौथी बार बदलाव करते हुए कमेटी में रेडियोलॉजिस्ट को शामिल करने के लिए अधीक्षक को पत्र लिखा गया है।
युवक की मौत से उठते 5 बड़े सवाल:
- पीबीएम के रेडियोलॉजी विभाग को आंतों में फैले 38 सेमी के लूप्स नजर क्यों नहीं आए?
- ट्रामा सेंटर में मरीज के पहुँचते ही तत्काल प्राथमिक इलाज और संबंधित विभाग के सीनियर डॉक्टर को क्यों नहीं बुलाया गया?
- निजी रिपोर्ट में आंतों की समस्या स्पष्ट होने के बाद भी मरीज को यूरोलॉजी विभाग में क्यों भटकाया गया?
- मौत के 6 दिन बाद भी अभी तक किसी की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई?
- प्रशासन ने भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए अब तक कोई SOP जारी क्यों नहीं की?
एक्सपर्ट की राय: रक्त प्रवाह बंद होने से फैला गैंग्रीन
वरिष्ठ सर्जन डॉ. तनवीर मालावत के अनुसार, रोगी की छोटी आंत को जीवित रखने वाली रक्त की सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई थी, जिसकी परिणति गैंग्रीन के रूप में हुई। समय पर अनुमान नहीं लग पाने के कारण शल्य चिकित्सा नहीं हो सकी, जो कि युवक की मौत का मुख्य कारण बनी।
