जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने वाहन मालिकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी नजीर पेश की है। जस्टिस अनूप कुमार ढंड की एकल पीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी वाहन की बिक्री के बाद भी परिवहन विभाग (RTO) के रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम दर्ज है, तो दुर्घटना की स्थिति में मुआवजे की पूरी जिम्मेदारी पुराने मालिक की ही होगी। कोर्ट ने कहा कि वाहन भले ही नीलामी या किसी निजी सौदे के जरिए बेचा गया हो, लेकिन जब तक कागजों में नाम नहीं बदलता, तब तक जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।
क्या था मामला?
यह मामला उदयपुर के तत्कालीन एसपी के नाम दर्ज एक जीप से जुड़ा है, जिसे नीलामी में बेचा गया था। 24 मार्च 2016 को बस्सी क्षेत्र में इस जीप ने एक बाइक सवार प्रहलाद कुमार चौधरी को जोरदार टक्कर मार दी थी। इस हादसे में प्रहलाद को गंभीर चोटें आईं और वे 30 फीसदी तक दिव्यांग हो गए।
निचली अदालत का फैसला पलटा:
शुरुआत में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने तत्कालीन एसपी उदयपुर को क्लेम की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया था। लेकिन हाईकोर्ट ने इस फैसले को बदलते हुए कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार हादसे के समय वाहन एसपी के नाम ही दर्ज था, इसलिए वे जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
मुआवजा राशि में भी हुई बढ़ोतरी:
हाईकोर्ट ने पीड़ित प्रहलाद की अपील पर सुनवाई करते हुए मुआवजा राशि को ₹6,52,767 से बढ़ाकर ₹7,75,178 कर दिया। कोर्ट ने यह भी पाया कि MACT कोर्ट ने पीड़ित की मासिक आय की गणना केवल 26 कार्य दिवसों के आधार पर की थी, जिसे सुधारते हुए अब पूरे 30 दिनों के आधार पर आंकने का आदेश दिया गया है।
