राजस्थान में RTE एडमिशन की लॉटरी जारी: 33 हजार प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटों पर मिलेगा नि:शुल्क प्रवेश, 1 अप्रैल से शुरू होगी पढ़ाई

जयपुर: राजस्थान में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश का इंतजार कर रहे लाखों अभिभावकों के लिए बड़ी खबर है । गुरुवार को जयपुर के शिक्षा संकुल में लॉटरी प्रक्रिया पूरी कर ली गई, जिससे विद्यार्थियों की वरीयता और प्राथमिकता का क्रम निर्धारित हो गया है । पहले यह लॉटरी सुबह घोषित होनी थी, लेकिन समय में बदलाव के बाद इसे दोपहर में जारी किया गया । अब अभिभावक ई-मित्र के माध्यम से अपने बच्चे का नंबर और स्कूल प्राथमिकता देख सकते हैं ।

6.34 लाख आवेदकों के बीच मुकाबला

इस साल प्रदेशभर के 33,548 प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश के लिए करीब 6.34 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं । शिक्षा विभाग ने इस बार नर्सरी (PP-3+), एलकेजी (PP-4+), यूकेजी (PP-5+) और पहली कक्षा में प्रवेश के लिए आवेदन मांगे थे । नियमों के अनुसार, नर्सरी क्लास की 25 प्रतिशत सीटों पर नि:शुल्क प्रवेश दिया जाएगा, जबकि अन्य कक्षाओं में खाली सीटों पर दाखिला होगा ।

प्रवेश की आगे की प्रक्रिया और सावधानी

लॉटरी निकलने के बाद अभिभावकों को अब अपने द्वारा चुने गए 5 स्कूलों में से उस स्कूल का चयन करना होगा, जहाँ प्रवेश की संभावना अधिक है । इसके बाद उन्हें मूल दस्तावेजों के साथ स्कूल पहुँचकर सत्यापन (Verification) कराना होगा । विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि आय प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज फर्जी पाए गए, तो स्कूल प्रबंधन संबंधित अभिभावक पर FIR दर्ज करवा सकता है । इसी पारदर्शिता के लिए इस बार आवेदन में पैन कार्ड (PAN Card) नंबर भी अनिवार्य किया गया था ।

पढ़ाई और प्राथमिकता के नियम

सभी चयनित स्टूडेंट्स की नियमित पढ़ाई 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो जाएगी । प्रवेश के समय उन बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी जो उसी नगर निगम वार्ड के निवासी हैं जहाँ स्कूल स्थित है । दूसरे वार्ड के छात्रों के प्रवेश पर यदि कोई आपत्ति होती है, तो उसे संबंधित कार्यालय में आवेदन देकर सुलझाया जा सकेगा ।

स्कूल संचालकों की नाराजगी

लॉटरी प्रक्रिया के बीच निजी स्कूल संचालकों ने सरकार के प्रति कड़ा रोष व्यक्त किया है । बीकानेर प्राइवेट स्कूल क्लब के अध्यक्ष मनोज व्यास ने आरोप लगाया कि सरकार प्री-प्राइमरी कक्षाओं (नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी) की फीस का पुनर्भुगतान नहीं कर रही है । उनका तर्क है कि चूँकि यह सरकारी योजना है, इसलिए इसका आर्थिक भार भी सरकार को ही उठाना चाहिए ।

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