जयपुर: सोशल मीडिया पर नेताओं के नकली बयान या किसी का डीपफेक (Deepfake) वीडियो वायरल करने वालों के लिए खतरे की घंटी बज गई है। केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दुरुपयोग कर बनाए गए फेक वीडियो, फोटो और ऑडियो पर अब तक का सबसे खतरनाक शिकंजा कस दिया है। नए नियमों के तहत, सोशल मीडिया पर ऐसी कोई भी गलती अब सीधे जेल की हवा खिला सकती है।
बिना लेबल AI कंटेंट पोस्ट करना अपराध इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने डीपफेक से फैल रही अफवाहों और सामाजिक अराजकता को कुचलने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है।
- नया नियम: अब सोशल मीडिया पर AI की मदद से तैयार किया गया कोई भी कंटेंट (चाहे वह वीडियो हो, फोटो हो या ऑडियो) बिना ‘लेबल’ (Label) के पोस्ट करना सीधा अपराध घोषित कर दिया गया है।
- मतलब साफ है: अगर कोई कंटेंट AI से बना है, तो पोस्ट करने वाले को यह साफ-साफ बताना होगा कि यह ‘AI जनरेटेड’ है। ऐसा न करके लोगों को गुमराह करना भारी पड़ेगा।
जीवनभर का पछतावा बन सकती है एक गलती सरकार के इस सख्त रुख के बाद सोशल मीडिया पर की गई एक छोटी सी गलती भी अब जीवनभर के पछतावे का सबब बन सकती है।
- सजा और जुर्माना: नियम तोड़ने वालों को अब भारी-भरकम जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। बात सिर्फ जुर्माने तक नहीं रुकेगी, बल्कि बार-बार चेतावनी मिलने के बाद भी उल्लंघन करने पर कोर्ट-कचहरी के चक्कर और जेल की सजा भी हो सकती है।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत? पिछले कुछ समय से AI टूल का इस्तेमाल कर राजनेताओं, अभिनेताओं और आम लोगों के डीपफेक वीडियो और ऑडियो बनाकर भ्रम फैलाया जा रहा था। इससे समाज में अशांति और अफवाहें फैलने का खतरा बढ़ गया था। इसी ‘डिजिटल झूठ’ को रोकने के लिए MeitY ने यह सख्त गाइडलाइन जारी की है।
