जयपुर: राजस्थान विधानसभा में आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। वित्त मंत्री दीया कुमारी जब बजट पेश करने सदन पहुंचीं, तो सबके चेहरे पर हैरानी और चर्चा का विषय एक ‘बदलाव’ था। दशकों से चली आ रही डार्क मैरून चमड़े के ब्रीफकेस की ब्रिटिश कालीन परंपरा को पीछे छोड़ते हुए, दीया कुमारी इस बार अपने हाथ में एक भव्य ‘भगवा बैग’ लेकर आईं।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और स्वदेशी की झलक
आजादी के बाद से ही बजट को मैरून या काले ब्रीफकेस में लाने की परंपरा रही है, जो औपनिवेशिक विरासत का प्रतीक मानी जाती थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केंद्र में ‘बही-खाता’ और ‘टैबलेट’ की शुरुआत के बाद, अब राजस्थान की भजनलाल सरकार ने भी अपनी जड़ों की ओर लौटने का स्पष्ट संदेश दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि सरकार के ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ के विजन को दर्शाता है।
यह बजट न केवल आर्थिक नीतियों का दस्तावेज है, बल्कि राजस्थान के सांस्कृतिक गौरव के पुनरुद्धार का भी गवाह बना है। भगवा बैग के साथ पेश होने वाला यह बजट प्रदेश को ‘विकसित राजस्थान 2030’ के लक्ष्य की ओर ले जाने का रोडमैप तैयार करेगा।
