बीकानेर: राजस्थान के राजकीय वृक्ष ‘खेजड़ी’ के संरक्षण को लेकर चल रहा आंदोलन गुरुवार को एक अभूतपूर्व मोड़ पर पहुँच गया। चार दिनों से जारी आमरण अनशन को खत्म कराने के लिए राज्य सरकार के प्रतिनिधि पहुंचे, लिखित आश्वासन दिया, लेकिन आदेश की ‘सीमित शर्तों’ ने आंदोलनकारियों के गुस्से को और भड़का दिया।
मंत्री के सामने ही छिड़ा विवाद
गुरुवार सुबह करीब 11 बजे कौशल एवं रोजगार मंत्री केके विश्नोई और राज्य जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत बिश्नोई बिश्नोई धर्मशाला स्थित अनशन स्थल पहुंचे। सरकार ने घोषणा की कि जोधपुर और बीकानेर संभाग में खेजड़ी की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। मंत्री ने अनशनकारियों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया।
हालांकि, जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि आदेश केवल दो संभागों तक सीमित है, माहौल तनावपूर्ण हो गया। आंदोलन की अगुवाई कर रहे परसराम विश्नोई ने घोषणा की कि, “खेजड़ी पूरे राजस्थान का राज्य वृक्ष है। सरकार हमें टुकड़ों में राहत देकर बांटना चाहती है। जब तक पूरे राजस्थान (सभी 50 जिलों) में पूर्ण प्रतिबंध का आदेश नहीं आता, अनशन जारी रहेगा।” इसके तुरंत बाद सभी प्रदर्शनकारी दोबारा अनशन पर बैठ गए।
विधायक के बयान पर जनता का आक्रोश
आंदोलन के दौरान फलोदी विधायक पब्बाराम विश्नोई के एक बयान ने ‘आग में घी’ का काम किया। विधायक ने अनशनकारियों की जान की जिम्मेदारी को लेकर टिप्पणी की, जिससे गुस्साई भीड़ ने उन्हें मंच से बैठने के लिए कह दिया और उनके खिलाफ नारेबाजी की।
बिगड़ता स्वास्थ्य और उमड़ता जनसैलाब

आंदोलन में अब तक 21 से अधिक अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ चुकी है। पर्यावरण जीव रक्षा समिति के अध्यक्ष मुखराम धरणीया की हालत गंभीर होने पर उन्हें पीबीएम अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। अनशन स्थल पर ही दो अन्य आंदोलनकारी बेहोश हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। इस आंदोलन में राजस्थान के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश से भी पर्यावरण प्रेमी और बड़ी संख्या में महिलाएं बीकानेर पहुँच रही हैं।
आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें:
- पूरे राजस्थान में खेजड़ी की कटाई पर तत्काल और पूर्ण प्रतिबंध।
- सौर ऊर्जा परियोजनाओं (Solar Projects) के नाम पर हो रही अवैध कटाई पर रोक।
- विधानसभा में ‘ट्री प्रोटेक्शन एक्ट’ पारित कर खेजड़ी को कानूनी सुरक्षा दी जाए।
