राजस्थान में बनेगा ‘चाइल्ड हर्ट डिजीज रजिस्ट्री’ का जाल, बच्चों के दिल के रोगों का अब होगा सटीक प्रबंधन

जयपुर, राजस्थान सरकार प्रदेश में बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में जन्मजात हृदय रोगों (Congenital Heart Disease – CHD) के प्रभावी प्रबंधन के लिए अब चाइल्ड हर्ट डिजीज रजिस्ट्री स्थापित की जाएगी। साथ ही, तकनीकी सुविधाओं को सुदृढ़ करते हुए रीजनल सीएचडी हब विकसित करने और टू-डी ईको (2D Echo) सेवाओं के विस्तार का निर्णय लिया गया है।

शुक्रवार को स्वास्थ्य भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय हितधारक बैठक (Stakeholder Meeting) में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. अमित यादव और अन्य विशेषज्ञों ने इस नई कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।


प्रमुख पहल और आगामी योजनाएं

बैठक में बच्चों के उपचार और फॉलोअप को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी:

  • स्टेट रजिस्ट्री: जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का डेटाबेस तैयार करने के लिए विशेष रजिस्ट्री।
  • रीजनल हब: प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सीएचडी हब विकसित किए जाएंगे ताकि स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञ उपचार मिल सके।
  • जांच सेवाओं का विस्तार: जिला स्तर तक टू-डी ईको सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा।
  • जेके लोन अस्पताल में नई सुविधा: हाल ही में जेके लोन अस्पताल में 20 करोड़ रुपये की लागत से सीवीटीएस (CVTS) सर्जरी इकाई शुरू की गई है, जहाँ अत्याधुनिक मशीनों से बच्चों का ऑपरेशन संभव हो पा रहा है।

उपचार के आंकड़े: एक नजर में

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) और राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से पिछले दो वर्षों में बड़ी संख्या में बच्चों को नया जीवन मिला है:

वित्तीय वर्षदवाइयों से उपचार (बच्चे)सर्जरी द्वारा उपचार (बच्चे)
2024-25468355
2025-26 (दिसंबर तक)262304

केरल मॉडल और विजन 2040

बैठक में अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘चिल्ड्रन हर्ट लिंक’ के प्रतिनिधियों ने भी शिरकत की। संस्था की प्रतिनिधि बिस्त्रा झेलेवा और वीरालक्ष्मी राजशेखर ने केरल राज्य और अन्य देशों के सफल ‘स्क्रीनिंग एवं रेफरल मॉडल’ के अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने राजस्थान के लिए ‘विजन 2040’ पर जोर देते हुए ‘पॉपुलेशन आधारित एप्रोच’ अपनाने का सुझाव दिया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों तक समय पर बीमारी की पहचान हो सके।

अतिरिक्त मिशन निदेशक डॉ. टी. शुभमंगला ने कहा कि बड़े शहरों से लेकर ढाणियों तक बच्चों को समय पर इलाज मिले, इसके लिए सभी विभागों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

“हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा जन्मजात हृदय रोग के कारण उपचार से वंचित न रहे। अत्याधुनिक सुविधाओं और रजिस्ट्री के माध्यम से हम हर केस की मॉनिटरिंग कर सकेंगे।” — डॉ. अमित यादव, मिशन निदेशक (NHM)

Share This Article
Leave a Comment
error: Content is protected !!