‘बायोमास ही दुनिया का एकमात्र उद्धार’: प्रेमशंकर झा

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक प्रेमशंकर झा ने अपनी पुस्तक ‘Sun, Wind and Biomass’ पर चर्चा करते हुए कहा कि सौर और पवन ऊर्जा की बात तो सब करते हैं, लेकिन ‘बायोमास’ (Biomass) की अनदेखी की जा रही है।

मुख्य बिंदु:

  • औद्योगिक ईंधन की खपत: झा ने चिंता जताई कि दुनिया के कुल ईंधन का 40% हिस्सा केवल उद्योगों (Industrial Heat) में खर्च हो जाता है। भारत में भी परिवहन और उद्योग मुख्य रूप से फॉसिल फ्यूल पर आधारित हैं।
  • बायोमास बनाम सौर/पवन ऊर्जा: सौर और पवन ऊर्जा अस्थिर होती है, जबकि बायोमास में मौजूद सेल्यूलोज ऊर्जा को संतुलित करने में सक्षम है।
  • बायोचार (Biochar) प्रोजेक्ट: उन्होंने पंजाब में निर्माणाधीन अपने प्रोजेक्ट का जिक्र किया, जहाँ फसल अवशेषों (पराली) को ‘सिंथेसिस गैस’ के जरिए ‘बायोचार’ में बदला जा रहा है। यह कुकिंग कोल (Coking Coal) से काफी सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल है।
  • रोजगार और कोल्ड स्टोरेज: उन्होंने सुझाव दिया कि यदि देश के 6,000 गांवों में बायोमास प्लांट लगाए जाएं, तो न केवल हर गांव के 20 लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि किसानों के लिए ‘चलित कोल्ड स्टोरेज’ की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे फसलों की बर्बादी रुकेगी।

‘प्रलय प्रोफेसी’: मृदुला रमेश का क्लाइमेट थ्रिलर

मृदुला रमेश ने अपनी तीसरी पुस्तक ‘The Pralaya Prophecy’ (प्रलय प्रोफेसी) के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि क्लाइमेट एक ऐसा विषय है जिस पर हर कोई बात तो करता है, लेकिन समाधान नहीं निकाल पाता।

  • नॉन-प्रीची थ्रिलर: मृदुला ने कहा, “केवल उपदेश देने से बदलाव नहीं आता। इसलिए मैंने एक फिक्शन-थ्रिलर का सहारा लिया है, जो बिना उपदेश दिए जल संरक्षण (Watershed) और पर्यावरण का संदेश देती है।”
  • सिस्टम की विफलता: उन्होंने नीति निर्माताओं को सचेत करते हुए कहा कि उन्हें समझना होगा कि पर्यावरण के लिए सबसे अच्छा क्या है। यूक्रेन जैसे देशों में फसल जलाने के बजाय उसे ऊर्जा में बदलने के 60 सालों के अध्ययन मौजूद हैं।

प्लास्टिक: स्टील की जगह लेने वाला ‘खतरनाक’ मेहमान

युवा एक्टिविस्ट अव्याना ने अपने स्कूली दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे प्लास्टिक की समस्या ने उन्हें जागरूक किया।

  • प्लास्टिक का जाल: उन्होंने कहा कि आज हमारे घरों में स्टील के बर्तनों की जगह प्लास्टिक ने ले ली है। हर कोई इसके नुकसान जानता है, लेकिन युवा पीढ़ी भी इस पर ठोस कदम नहीं उठा रही।
  • पुनर्चक्रण (Recycling): अव्याना ने सुझाव दिया कि हमें प्लास्टिक वेस्ट को सीधे कंपनियों को भेजना चाहिए ताकि वे इसका सही तरह से ‘रीयूज’ कर सकें।

निष्कर्ष: सत्र का सारांश यह रहा कि बायोमास कार्बन न्यूट्रल होता है क्योंकि यह प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के जरिए हवा से ली गई कार्बन को वापस चक्र में भेज देता है। यदि भारत अपने 1.2 बिलियन टन बायोमास कचरे का सही उपयोग करे, तो ऊर्जा संकट और प्रदूषण दोनों का समाधान संभव है।

Share This Article
Leave a Comment
error: Content is protected !!