-पुलिस के लिए चुनौती बने गौ-तस्कर, 5 साल में 110 तस्कर गिरफ्तार, 63 अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर
-तस्करों की अवैध संपत्ति पर प्रहार, धारा 107 के तहत काली कमाई से बनाई गई संपत्तियों को जब्त करने की बड़ी कार्रवाई शुरू
-तीन सालों का चौंकाने वाला आंकड़ा, राज्य में तस्करी के कुल 791 मामले दर्ज, 582 में अदालत में चालान पेश
जयपुर। राजस्थान में गौ-तस्करी अब कोई आम अपराध नहीं, बल्कि पुलिस और खूंखार तस्करों के बीच छिड़ी एक खूनी जंग में तब्दील हो चुकी है। तस्करों के दुस्साहस का आलम यह है कि उन्होंने अलवर, डीग और भिवाड़ी जैसे सीमावर्ती जिलों को अपना अभेद्य गढ़ बना लिया है और बेखौफ होकर खाकी पर गोलियां बरसा रहे हैं। ‘Expose Now’ की स्पेशल रिसर्च के खौफनाक आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि 2021 से 2025 के बीच, महज पांच सालों में पुलिस और तस्करों के बीच 54 भयानक मुठभेड़ें हो चुकी हैं। गोलियों की इस तड़तड़ाहट में जहां 13 तस्कर पस्त हुए हैं, वहीं इन अपराधियों से लोहा लेते हुए राजस्थान पुलिस के 9 जांबाज जवान भी लहूलुहान हुए हैं। इन पांच सालों की मुठभेड़ों में 110 शातिर गौ-तस्करों को दबोच कर सलाखों के पीछे धकेला गया है। लेकिन सिस्टम के लिए अभी भी सबसे बड़ा सिरदर्द वो 63 खूंखार तस्कर हैं, जो पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहे हैं। सिर्फ पिछले तीन सालों (2023 से 2025) का रिकॉर्ड खंगालें, तो पूरे प्रदेश में गौ-तस्करी के 791 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 582 मामलों में पुलिस ने कोर्ट में चालान ठोक कर तस्करों की मजबूत घेराबंदी कर दी है।
पुलिस की कार्यवाही सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गई है। सरकार ने इन गौ-तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए एक नया और सख्त कदम उठाया है। जो अपराधी लगातार गौ-तस्करी कर रहे हैं और पुलिस पर हमला करने से नहीं चूकते, उनकी ऐसी काली कमाई से बनाई गई अवैध संपत्तियों को अब बीएनएसएस (BNSS) की धारा 107 के तहत जब्त और नष्ट करने की बड़ी कार्यवाही शुरू कर दी गई है। उदाहरण के तौर पर, एक आरोपी के खिलाफ संपत्ति जब्ती का इस्तगासा न्यायालय में पेश किया जा चुका है, और गिरफ्तार किए गए अन्य 5 मुल्जिमों की संपत्ति का रिकॉर्ड निकाला जा रहा है ताकि उन पर भी एक्शन लिया जा सके। इसके अलावा, अलवर और भरतपुर जैसे अतिसंवेदनशील जिलों में गौ-रक्षा के लिए 12 नई पुलिस चौकियां भी स्थापित की गई हैं, ताकि इन तस्करों के नेटवर्क को शुरुआती दौर में ही जड़ से उखाड़ा जा सके।
54 मुठभेड़ और 110 तस्कर सलाखों के पीछे:-
आंकड़ों के अनुसार, विगत पांच वर्षों (2021 से 2025 तक) में राजस्थान में पुलिस और गौ-तस्करों के बीच कुल 54 मुठभेड़ की घटनाएं हुई हैं। इन खतरनाक मुठभेड़ों में 13 गौ-तस्कर घायल हुए हैं, जबकि तस्करों को रोकते हुए 9 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस ने इन ऑपरेशन्स में 110 गौ-तस्करों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा है, हालांकि 63 शातिर तस्कर अभी भी फरार चल रहे हैं और पुलिस की रडार पर हैं।
तीन साल में 791 मामले, 582 में चार्जशीट:-
गौ-तस्करी के कुल मामलों पर नजर डालें तो पिछले तीन सालों (2023 से 2025) में ही प्रदेश के भीतर गौ-तस्करी के कुल 791 प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस ने इनमें से 582 मामलों में सख्त कार्रवाई करते हुए न्यायालय में चालान भी पेश कर दिया है। अलवर, डीग और भिवाड़ी जैसे जिले गौ-तस्करी का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरे हैं, जहां लगातार पुलिस की कार्रवाई जारी है।
तस्करों की काली कमाई पर सरकार का ‘हथौड़ा’:-
अब पुलिस गौ-तस्करों की केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी आर्थिक कमर तोड़ने की भी तैयारी हो चुकी है। जो तस्कर निरंतर गौ-तस्करी कर रहे हैं और पुलिस पर हमला कर रहे हैं, उनकी अपराध से अर्जित की गई संपत्ति को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 107 के तहत जब्त व नष्ट करने की बड़ी कार्रवाई की जा रही है। अब तक 1 अपराधी के खिलाफ संपत्ति जब्ती का इस्तगासा न्यायालय में पेश किया जा चुका है, जबकि 5 अन्य गिरफ्तार मुल्जिमों की अवैध संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड निकाला जा रहा है ताकि उन पर बुलडोजर और जब्ती की कार्रवाई की जा सके।
वाहनों की जब्ती और 12 नई चौकियां:-
तस्करी पर नकेल कसने के लिए कड़े कानूनों का भी सहारा लिया जा रहा है। तस्करी में इस्तेमाल होने वाले वाहनों, वाहन चालकों और मालिकों के खिलाफ राजस्थान गौवंशीय पशु अधिनियम 2018 के तहत कड़ी कार्रवाई की जा रही है, जिसमें वाहनों को जब्त (अधिहरण) किया जा रहा है। इसके अलावा, गौ-रक्षा के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले भरतपुर और अलवर जिलों में 12 नई पुलिस चौकियां विशेष रूप से स्थापित की गई हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now