जयपुर। डेटिंग ऐप पर किसी खूबसूरत प्रोफाइल से मैच हुआ… चैट शुरू हुई… सामने वाले ने कुछ ही दिनों में ऐसा भरोसा जीता कि मुलाकात का इंतजार होने लगा। लेकिन जिस डेट का सपना लेकर आप कैफे पहुंच रहे हैं, वहां आपका इंतजार प्यार नहीं बल्कि ठगी का पूरा सिंडिकेट कर रहा हो तो?
साइबर अपराधियों ने अब डेटिंग ऐप की ‘दोस्ती’ को ठगी का नया हथियार बना लिया है। Tinder, Bumble और Hinge जैसे प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर पहले दोस्ती की जाती है, फिर चैटिंग और वीडियो कॉल के जरिए भरोसा कायम किया जाता है। इसके बाद मुलाकात के नाम पर पीड़ित को ऐसे कैफे या रेस्टोरेंट में बुलाया जाता है, जहां पहले से ही ठगी का पूरा इंतजाम रहता है।
राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने डेटिंग और मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाली ठगी को लेकर लोगों को सतर्क किया है। पुलिस की एडवाइजरी में फर्जी प्रोफाइल, चोरी की तस्वीरों और झूठी पहचान के जरिए लोगों को भावनात्मक रूप से फंसाने के मामलों को लेकर चेताया गया है।

पहले ‘हाय’… फिर भरोसा… और आखिर में भारी-भरकम बिल
ठगी का तरीका बेहद सुनियोजित बताया जा रहा है। साइबर ठग महिला या पुरुष के नाम से आकर्षक प्रोफाइल बनाते हैं। प्रोफाइल पर खूबसूरत तस्वीरें, अच्छी नौकरी, महंगी लाइफस्टाइल और आकर्षक शौक दिखाकर सामने वाले को प्रभावित किया जाता है।
मैच होने के बाद बातचीत डेटिंग ऐप से निकलकर WhatsApp या दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंचती है। लगातार चैटिंग के जरिए भरोसा बढ़ाया जाता है। कई मामलों में वीडियो कॉल के जरिए भी प्रोफाइल को असली दिखाने की कोशिश की जाती है।
इसके बाद आता है ‘मिलने का प्लान’।
यहीं से ठगी का दूसरा अध्याय शुरू होता है।
सामने वाला बार-बार अपनी पसंद के किसी खास कैफे, बार या रेस्टोरेंट में मिलने की बात करता है। अगर पीड़ित अपनी पसंद की कोई सार्वजनिक जगह सुझाता है तो उसे टाल दिया जाता है। कई बार ऐसा स्थान चुना जाता है जहां पहले से ठगों का नेटवर्क सक्रिय होता है।
कैफे पहुंचते ही बदल जाता है पूरा खेल
पीड़ित जब कैफे पहुंचता है तो सामने वाला कुछ देर सामान्य बातचीत करता है। ड्रिंक, स्नैक्स, हुक्का या खाने-पीने का ऑर्डर कराया जाता है। इसके बाद किसी बहाने से डेट पर आया व्यक्ति वहां से निकल जाता है।
पीड़ित को लगता है कि शायद वह थोड़ी देर में वापस आएगा।
लेकिन कुछ देर बाद टेबल पर आता है ऐसा बिल, जिसे देखकर होश उड़ जाएं।
15 हजार… 30 हजार… 50 हजार… और कई मामलों में एक-दो लाख रुपये तक का बिल!
जब पीड़ित बिल पर सवाल उठाता है या भुगतान करने से इनकार करता है तो कथित तौर पर कैफे कर्मचारी, मैनेजर या बाउंसर दबाव बनाना शुरू कर सकते हैं। डराने-धमकाने से लेकर जबरन भुगतान कराने तक की स्थिति पैदा हो सकती है।
यानी डेटिंग ऐप पर शुरू हुआ मामला कुछ ही घंटों में ‘डेट’ से ‘वसूली’ में बदल जाता है।
आंकड़े बता रहे हैं खतरे की गंभीरता
डेटिंग ऐप फ्रॉड को लेकर उपलब्ध आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। I4C के 2024 के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अप्रैल के दौरान देशभर में 1,725 रोमांस/डेटिंग स्कैम की शिकायतें सामने आई थीं, जिनमें करीब 13.23 करोड़ रुपये की रकम गंवाने की रिपोर्ट हुई थी।
हालांकि ये आंकड़े केवल रिपोर्ट की गई शिकायतों को दर्शाते हैं। डेटिंग या रोमांस फ्रॉड की हर घटना अलग से दर्ज हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
वहीं NCRB के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल 1,01,928 साइबर क्राइम मामले दर्ज हुए, जिनमें 73,987 यानी करीब 72.6 प्रतिशत मामले फ्रॉड के मकसद से जुड़े थे।
एक और चौंकाने वाला आंकड़ा MCA fee के 2026 के शोध से सामने आया। भारत में सर्वे किए गए लोगों में 75 प्रतिशत ने डेटिंग ऐप, वेबसाइट या सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल या AI से बनी तस्वीरों का सामना करने की बात कही, जबकि 46 प्रतिशत ने बताया कि उन्हें बाद में पता चला कि वे किसी बॉट या फर्जी प्रोफाइल से बातचीत कर रहे थे। करीब 33 प्रतिशत ने कैटफिशिंग का शिकार होने की बात कही और 7 में से 1 भारतीय ने ऑनलाइन डेटिंग/रोमांस स्कैम में पैसे गंवाने की जानकारी दी।
फर्जी फोटो से लेकर AI प्रोफाइल तक का खेल
अब साइबर ठग केवल चोरी की तस्वीरों तक सीमित नहीं हैं। AI की मदद से ऐसी तस्वीरें और प्रोफाइल भी तैयार की जा सकती हैं, जो पहली नजर में बिल्कुल वास्तविक लगें।
यही वजह है कि पुलिस और साइबर विशेषज्ञ किसी अनजान डेटिंग प्रोफाइल पर सिर्फ फोटो देखकर भरोसा नहीं करने की सलाह दे रहे हैं।
दिल्ली में 2026 में सामने आया एक मामला भी बताता है कि डेटिंग ऐप का इस्तेमाल संगठित हनी-ट्रैप और एक्सटॉर्शन गिरोह तक कर रहे हैं। पुलिस ने Tinder जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को जाल में फंसाने और बाद में धमकाकर वसूली करने वाले गिरोह का खुलासा किया था।
पहली डेट में ये गलती न करें
राजस्थान पुलिस की सलाह—
राजस्थान साइबर थाना प्रभारी गजेंद्र शर्मा ने बताया कि
अनजान व्यक्ति से मिलने से पहले उसकी सोशल मीडिया प्रोफाइल जांचें।
वीडियो कॉल के जरिए प्रोफाइल की वास्तविकता जांचने की कोशिश करें।
किसी खास कैफे या रेस्टोरेंट में मिलने का लगातार दबाव हो तो सावधान हो जाएं।
कैफे की ऑनलाइन रेटिंग और निगेटिव रिव्यू जरूर पढ़ें।
पहली मुलाकात हमेशा भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थान पर करें।
घर का पता, ऑफिस लोकेशन, बैंक डिटेल या वित्तीय जानकारी साझा न करें।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर APK या संदिग्ध ऐप डाउनलोड न करें।
असामान्य बिल मिलने पर तुरंत अकेले बहस करने के बजाय पुलिस की मदद लें।
ठगी हो जाए तो ‘शर्म’ नहीं, तुरंत शिकायत
साइबर ठगी के बाद चुप रहना अपराधियों के लिए सबसे बड़ा फायदा बन सकता है। पीड़ित को तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए और राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करनी चाहिए। केंद्र सरकार के अनुसार 1930 के जरिए वित्तीय साइबर फ्रॉड की तत्काल रिपोर्टिंग और रकम को रोकने की व्यवस्था की गई है। 2021 से 2025 के बीच NCRP पर वित्तीय साइबर फ्रॉड की शिकायतों में रिपोर्ट की गई रकम ₹55,649 करोड़ से अधिक रही।
डेटिंग ऐप पर हर ‘मैच’ प्यार नहीं होता। कुछ मैच अपराधियों का बिछाया जाल भी हो सकते हैं। फर्जी प्रोफाइल, बनावटी भरोसा, चुना हुआ कैफे और लाखों का बिल—साइबर ठगों ने डेटिंग को भी अब ठगी के कारोबार में बदलने की कोशिश शुरू कर दी है। इसलिए अगली बार स्क्रीन पर ‘It’s a Match’ दिखाई दे तो दिल से पहले दिमाग को मैच कराना जरूरी है।