वास्तु शास्त्र: कहीं आपके घर का गार्डन ही तो नहीं बना रहा आपको कर्जदार? दिशाओं के हिसाब से जानिए बगीचा बनाने के नियम

वास्तु के अनुसार बनाएं गार्डन–                

 घर का गार्डन केवल सुंदरता नहीं देता बल्कि यह आपके घर की सारी ऊर्जा को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। वास्तु शास्त्र में Garden केवल पौधों और फूलों का समूह नहीं माना जाता यह घर के ऊर्जा क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। एक सही दिशा में बना गार्डन आपके जीवन में भौतिक समृद्धि, पारिवारिक सामंजस्य, जीवन में शांति और खुशियां लेकर आता है लेकिन गलत दिशा में बना गार्डन साक्षात राहु और शनि जैसे क्रूर ग्रहों को एक्टिव करके आपके जीवन में इसके विपरीत समस्याओं का कारण भी बन सकता है। यही कारण है कि कुछ घरों में गार्डन खुशहाली लाता है और कुछ घरों में वही गार्डन समस्याओं का कारण बन जाता है।

गार्डन की गलत दिशा

 नैऋत्य कोंण वास्तु में दक्षिण पश्चिम का कोना स्थिरता, पारिवारिक सामंजस्य, सुरक्षा, वैवाहिक जीवन एवं मान सम्मान में से जुड़ा हुआ माना जाता है। वास्तु के अनुसार यह क्षेत्र भारी, ऊंचा और बंद होना चाहिए लेकिन यदि यहां पर खुला गार्डन, घास या गहरा खालीपन या खुलापन बना दिया जाए तो यह आपकी स्थिरता को कमजोर करके आत्मविश्वास में कमी, व्यापार में धन का रुकना, कर्ज की समस्या, घर के मुखिया को बीमारियां, प्रयासों में सफलता की कमी, संतान का बिगड़ना, गंभीर और बड़ी बीमारियां, समाज में मान सम्मान की कमी और कोर्ट कचहरी की समस्या भी आपको दे सकता है। यहां गार्डन बनाने से बचें और गलती से बन गया है तो गार्डन के चारों ओर गोमेद रत्नों से युक्त राहु ग्रह के हस्त निर्मित वैदिक यंत्र अवश्य स्थापित कर देने चाहिए।                                 

दक्षिण दिशा– यह यम और पितरों के साथ ही मंगल ग्रह से जुड़ी दिशा है। यह दिशा आपके रिलैक्सेशन, फेम एवं सुरक्षा से जुड़ी हुई दिशा है। दक्षिण भाग अत्यधिक खुला, हल्का और गार्डन के कारण गीला रहने से मानसिक तनाव, अनावश्यक खर्च, स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां, आर्थिक नुकसान, व्यापार में स्पीड स्लो और आपकी मानसिक शांति पर भी इसका दुष्प्रभाव दिखाई दे सकता है। यहां गार्डन हो तो इसके चारों ओर मूंगा रत्नों से युक्त मंगल ग्रह के वैदिक यंत्र अवश्य स्थापित कर देने चाहिए।                                                                             

आग्नेय कोण में अग्नि तत्व विद्यमान होने के कारण यहां गार्डन बनाने से खुला एरिया और जल की उपस्थिति होने के कारण बिजनेस में कैश फ्लो की समस्या, महिलाओं के स्वास्थ्य में गिरावट, संतान प्राप्ति में विलंब, दांपत्य सुख में कमी और मानसिक तनाव भी देखने को मिल सकता है। यहां गार्डन होने पर ओपल रत्नों से युक्त शुक्र ग्रह के वैदिक यंत्रों को चारों कोणों में स्थापित कर देना चाहिए।                                                                          

गार्डन की सही दिशा

वास्तु के अनुसार ईशान कोण देव पूजन की दिशा है और यहां वास्तु देवता का सिर विद्यमान है। इस जगह छोटे पौधे, फूलों की क्यारी, तुलसी और हरियाली रखना बेहद शुभ माना जाता है। आप कुबेर की दिशा उत्तर एवं सूर्य की दिशा पूर्व में भी हरी घास, सुंदर फूलों के छोटे पौधे एवं तुलसी आदि पौधे लगा सकते हैं। इससे मानसिक शांति, धन के अच्छे अवसर, आध्यात्मिक उन्नति, संतान की शिक्षा में प्रगति, पॉजिटिव एनर्जी एवं पारिवारिक सामंजस्य में भी वृद्धि देखने को मिलती है।                                                                            

गार्डन की कुछ गलतियों से बचना चाहिए जैसे सूखे और मृत पौधे रखना, पीपल, बरगद जैसे बड़े पेड़ लगाना, टूटा फवारा, गंदगी और कचरा जमा रहना, कांटेदार अथवा दूध वाले पेड़ पौधों की अधिकता होने पर नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अशांति में वृद्धि देखने को मिलती है।  

वास्तु के अनुसार अनुकूल बड़े पेड़ आप दक्षिण अथवा पश्चिम के कॉर्नर में लगा सकते हैं।  

Note-यह लेख ज्योतिषीय दृष्टिकोण पर आधारित है और ज्ञानवर्धन के उद्देश्य से लिखा गया है।

Dr. Yogesh Vyas

डॉ. योगेश व्यास

ख्यातिप्राप्त ज्योतिषाचार्य, वास्तु विशेषज्ञ, अंक ज्योतिषविद् एवं शोधकर्ता

भारतीय ज्योतिष एवं वास्तु के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम, डॉ. योगेश व्यास पिछले लगभग 20 वर्षों से ज्योतिषीय अनुसंधान और 15 वर्षों से अधिक समय से व्यावसायिक परामर्श के माध्यम से लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। ज्योतिषाचार्य (टॉपर), NET (ज्योतिष शास्त्र एवं संस्कृत) तथा Ph.D. (ज्योतिष शास्त्र) से अलंकृत डॉ. व्यास ने 25 से अधिक प्रकाशित पुस्तकें भी लिखी हैं।

संपर्क: ASTRO Vyas Ji | मानसरोवर, जयपुर


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