-तीन फर्मों के दस्तावेजों में थी कमियां, फिर भी एक को कर दिया पास, फायनेंस कमेटी ने लौटाया एजेंडा, EPC को दोबारा समीक्षा के निर्देश
जयपुर। बांसवाड़ा जिले के परतापुर-गढ़ी कस्बे की शहरी जल प्रदाय योजना के पुनर्गठन और कायाकल्प का काम तकनीकी खामियों और नियमों के फेर में उलझ गया है। बजट घोषणा 2025-26 के तहत होने वाले इस 16.52 करोड़ के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की तकनीकी बिड (Technical Bid) को फायनेंस कमेटी (FC) ने मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। कमेटी ने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के इस एजेंडे को गंभीर कमियों के चलते वापस इम्पॉवर्ड प्रोक्योरमेंट कमेटी (EPC) को लौटा दिया है। इस फैसले के बाद अब परियोजना के क्रियान्वयन में और देरी होना तय माना जा रहा है, हालांकि कमेटी ने RTPP Rules के तहत प्रक्रिया में हुई देरी को माफ (Condone) कर दिया है।

तीन में से दो ठेकेदार ‘अयोग्य’, तीसरे को कमियों के बाद भी किया पास:-
जानकारी के अनुसार निविदा संख्या- 14/2025-26 के तहत इस काम के लिए तीन ठेका कंपनियों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। इनमें मैसर्स कुमावत एंड कंपनी, मैसर्स हिंगोले सिंह सोधा और मैसर्स डागर कंस्ट्रक्शन कंपनी शामिल थीं। मुख्य अभियंता (शहरी एवं एनआरडब्ल्यू) की अध्यक्षता में हुई ‘बिड इवैल्युएशन कमेटी’ (BEC) की जांच में शुरुआती दो कंपनियां तकनीकी रूप से अयोग्य (Non-Responsive) पाई गई।
मैसर्स कुमावत एंड कंपनी ने पिछले वित्तीय वर्ष (2022-23 से 2024-25) के दस्तावेजों में नेटवर्थ की अनिवार्य शर्त को पूरा नहीं कर सकी। साथ ही CA सर्टिफिकेट में कंपनी का नाम गायब था। मैसर्स हिंगोले सिंह सोधा फर्म ने बिडिंग कैपेसिटी (काम करने की क्षमता) का फॉर्म (FIN-3) और रिलेशनशिप सर्टिफिकेट (अनुलग्नक-2) ऑनलाइन अपलोड ही नहीं किया। इसके चलते मैदान में केवल मैसर्स डागर कंस्ट्रक्शन कंपनी ही बची, जिससे यह मामला ‘सिंगल टेंडर’ जैसी स्थिति में आ गया।

‘सिंगल टेंडर’ कंपनी के दस्तावेजों में भी गंभीर लापरवाही:-
हैरानी की बात यह है कि जिस एकमात्र कंपनी मैसर्स डागर कंस्ट्रक्शन को विभाग ने ‘योग्य’ (Responsive) माना, उसके दस्तावेजों में भी भारी लापरवाही सामने आई है। Expose Now के खुलासे के बाद फायनेंस कमेटी की बैठक में जब फिर से फर्म के दस्तावेंजों की जांच की गई सामने आया कि फर्म द्वारा बिडिंग कैपेसिटी के लिए दिए गए एफिडेविट (FIN-3) पर तारीख ही अंकित नहीं थी, जिससे निविदा खुलने के 7 दिन पहले की वास्तविक क्षमता का आकलन करना असंभव था। फर्म द्वारा जमा कराए गए ‘पॉवर ऑफ अटॉर्नी’ और बैंक गारंटी (BG) जैसे बेहद संवेदनशील दस्तावेजों पर एनआईटी (NIT) संख्या ही गलत दर्ज थी।
फायनेंस कमेटी ने कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल:-
फायनेंस कमेटी ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब डागर कंस्ट्रक्शन के दस्तावेजों में इतनी कमियां थीं, तो RTPP नियम- 60 और 61 के तहत पहले ही स्पष्टीकरण क्यों नहीं मांगा गया? बिना ईपीसी (EPC) की अंतिम सिफारिशों के एजेंडे को सीधे फायनेंस कमेटी में लाना नियमों के खिलाफ है। फायनेंस कमेटी ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिए हैं कि इस पूरे मामले को वापस इम्पॉवर्ड प्रोक्योरमेंट कमेटी (EPC) के समक्ष रखा जाए। विभाग को आदेश दिए गए हैं कि वह संबंधित फर्म से तकनीकी कमियों पर विधिवत स्पष्टीकरण मांगे, पूरी प्रक्रिया की दोबारा बारीकी से समीक्षा करे और ईपीसी की ठोस अभिशंसा (Recommendations) के साथ नया एजेंडा नोट फाइनेंस कमेटी के सामने प्रस्तुत करे।
अब इसे टेंडर में विभागीय अधिकारियों की लापरवाही कहें या मिलीभगत। लेकिन विभागीय अधिकारियों की इस प्रक्रिया ने ये तो साबित कर दिया है कि बासंवाड़ा जिले के परतापुर-गढ़ी कस्बे की पेयजल योजना में सुधार की यह योजना पिछले एक साल से फाइलों में दौड़ रही है और अभी इस योजना का कार्य कब शुरू होगा, यह भी निश्चित नहीं है।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
