-बड़ा सवाल जब जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के खुद के विधानसभा क्षेत्र में इंजीनियर्स की यह मनमानी है, तो प्रदेश की बाकी 199 विधानसभा सीटों में क्या हाल होगा !
जयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार मुक्त शासन और ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की धज्जियां खुद जलदाय विभाग (PHED) के इंजीनियर उड़ा रहे हैं। वो भी कहीं और नहीं, बल्कि खुद पीएचईडी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के गृह विधानसभा क्षेत्र मालपुरा (टोंक) में। Expose Now के खुलासे के बाद जब पीएचईडी की उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक में जब अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच की तो एक ऐसा सच सामने आया, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। मंत्री जी के क्षेत्र में जनता की प्यास बुझाने के नाम पर 1733.02 लाख रुपये (करीब 17.33 करोड़) की एक बड़ी योजना को किस तरह अफसरों और चहेते ठेकेदारों की जुगलबंदी की भेंट चढ़ाया जा रहा था, इसका पूरा कच्चा चिट्ठा खुल चुका है।

Inside Story: चहेती फर्मों को उपकृत करने और बिना काम ‘फर्जी भुगतान’ का था मास्टरप्लान !
मालपुरा संभाग के ग्राम पंचायत भासू, डबरडूम्बा, मूंडिया कलां, भावंता और लक्ष्मीपुरा धाकरान के गांवों के लिए क्षेत्रीय जल आपूर्ति योजना (Augmentation of Regional Water Supply Scheme) स्वीकृत हुई थी। टेंडर प्रक्रिया (NIT No. 19/2025-26) के दौरान ही अंदरखाने एक ऐसा ‘घोलमाल’ तैयार किया गया, जिससे किसी खास चहेती फर्म को ही यह बड़ा काम मिले।
बोलियां खुलने के बाद बदला ‘खेल’:-
1 जनवरी 2026 को तकनीकी बोलियां (Technical Bids) खोली गईं। कुल 4 कंपनियों (M/s कुमावत & कंपनी, M/s माहेश्वरी कॉन्ट्रैक्टर्स, M/s निहाल चंद जैन इन्फ्रा और M/s RSC इन्फ्राटेक) ने दावेदारी की। अपनी पसंदीदा फर्म को फायदा पहुँचाने के लिए अजमेर रीजन के अतिरिक्त मुख्य अभियंता (ACE) ने टेंडर आमंत्रित होने के बाद बैकडोर से एक शुद्धिपत्र (Corrigendum No- 1) जारी कर दिया। इसके ज़रिए ‘बिल ऑफ क्वांटिटीज’ (BOQ) की वस्तुओं और यूनिट्स में भारी और बुनियादी बदलाव (Substantive Modifications) कर दिए गए।
सूत्रों का बड़ा दावा, बिना काम करोड़ों के भुगतान की थी साजिश:-
विभागीय सूत्रों के अनुसार BOQ में यह चोरी-छिपे बदलाव सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं थी। यह एक सोची-समझी ‘योजना’ थी ताकि भविष्य में बिना धरातल पर काम किए, बदली हुई मदों (Items) की आड़ में करोड़ों रुपयों का फर्जी भुगतान (Fake Payment) उठाया जा सके और चहेती फर्मों की जेबें भरी जा सकें।

RTPP एक्ट का उल्लंघन, जब ‘चोरी’ पकड़ी गई तो रद्द करना पड़ा टेंडर:-
जब यह मामला बिड इवैल्युएशन कमेटी (BEC) और वित्त समिति(FC) के सामने पहुँचा, तो अफसरों का यह खेल बेनकाब हो गया। कमेटी ने साफ़ माना कि टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के बाद BOQ बदलना RTPP Act, 2012 और नियमों का खुला उल्लंघन है। वित्तीय अस्पष्टता और धांधली की बू आने के कारण कमेटी को मजबूरी में इस पूरे टेंडर को अवैध घोषित कर रद्द (Annul) करना पड़ा।
मंत्री के क्षेत्र में भारी लापरवाही या फिर मिलीभगत का था खेल:-
अफसरों के इस ‘फर्जीवाड़े के खेल’ के कारण मुख्यमंत्री बजट घोषणा की इस योजना में भारी देरी हो चुकी है। अब लागत बढ़ने (Cost Escalation) का खतरा मंडरा रहा है। अब सवाल उठता है कि रामचन्द्र राड, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, पीएचईडी अजमेर(अतिरिक्त चार्ज) के द्वारा अजमेर संभाग के अधिकांश टेंडरों को मैनेज करने के लिए पिछले लंबे समय से ही ऐसे खेल किए जा रहे हैं। पीएचईडी मंत्री कन्हैयालाल के करीबी होने के कारण उन्हें विभाग के आलाधिकारियों का कोई डर नहीं है और इसलिए वे पीएचईडी मंत्री के विधानसभा क्षेत्र के टेंडरों में भी गंभीर अनियमितताएं और फर्जीवाड़ा करने से नहीं चूक रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पीएचईडी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी को इसकी जानकारी नहीं हैं या फिर इस मिलीभगत के खेल को उनका भी संरक्षण मिला हुआ है।
दोषी अफसरों को चार्जशीट की तैयारी:-
इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार संबंधित अधिकारियों को तत्काल ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी करने के आदेश दिए गए हैं। अतिरिक्त मुख्य अभियंता को सख्त हिदायत दी गई है कि वे लिखित गारंटी (Certificate) दें कि इस योजना का बजट किसी दूसरी योजना (जैसे JJM या अमृत 2.0) में दिखाकर बजट का दोहराव (Duplication of work) तो नहीं किया जा रहा है। यह बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाला है कि जिस विभाग के मुखिया कन्हैयालाल चौधरी खुद भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के बड़े-बड़े बयान देते हैं, उन्हीं के इलाके मालपुरा में उनके चहेते इंजीनियर्स बेखौफ होकर सरकारी खजाने को चूना लगाने का ताना-बाना बुन रहे थे।
Expose Now के सवाल, क्या PHED मंत्री दे पाएंगे जवाब ?
-जब जलदाय मंत्री के खुद के विधानसभा क्षेत्र में इंजीनियर्स के फर्जीवाड़े का यह आलम है, तो प्रदेश की बाकी 199 विधानसभा सीटों पर चल रहे प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता की क्या स्थिति होगी?
-क्या मंत्री जी अपने ही क्षेत्र में ‘फर्जी भुगतान’ की बिसात बिछाने वाले इन रसूखदार इंजीनियर्स को सिर्फ नोटिस देकर छोड़ देंगे या इन्हें सस्पेंड कर जेल की हवा खिलाएंगे?
-जनता की प्यास से खिलवाड़ करने वाले इन भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अब निर्णायक कार्रवाई होगी या फिर संरक्षण का खेल रहेगा जारी ?
इस टेंडर के रद्द होने से टोंक की 5 ग्राम पंचायतों की जनता को पानी के लिए अभी और लंबा इंतजार करना होगा। अफसरों और ठेकेदारों के इस ‘फर्जी भुगतान’ के लालच की सजा अंततः आम जनता भुगत रही है। कमेटी ने ताजा टेंडर (Fresh Bids) आमंत्रित करने के आदेश तो दे दिए हैं, लेकिन देखना यह है कि क्या नए टेंडर में पारदर्शिता अपनाई जाती है या फिर पर्दे के पीछे से खेल खेलने वाले ये ‘रसूखदार इंजीनियर्स’ भ्रष्टाचार का कोई नया रास्ता तलाश लेते हैं !
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
