‘मायड़ भाषा’ को मिला संवैधानिक सम्मान: SC ने कहा- 8वीं अनुसूची का इंतजार करना तर्कहीन, स्कूलों में लागू हो राजस्थानी

नई दिल्ली। राजस्थान की साढ़े सात करोड़ जनता के दशकों पुराने संघर्ष और ‘मायड़ भाषा’ के सम्मान की लड़ाई में देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने एक मील का पत्थर स्थापित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को एक विषय के रूप में अनिवार्य रूप से शामिल करने के लिए व्यापक नीति बनाई जाए।

“हम मूक दर्शक नहीं रह सकते”: सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के सुस्त रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब राजस्थानी भाषा विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है, तो इसे स्कूली स्तर पर लागू करने में अड़चन क्यों है?

  • संवैधानिक कर्तव्य: बेंच ने स्पष्ट किया कि बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) का मूल आधार है।
  • सख्त रुख: कोर्ट ने कहा कि शैक्षणिक मान्यता देने के लिए संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल होने का इंतजार करना तर्कहीन है।

प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के लिए नए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को इस आदेश को चरणबद्ध (Phased Manner) तरीके से लागू करने को कहा है:

  1. शुरुआती स्तर: फाउंडेशनल और प्रिपरेटरी स्तर पर राजस्थानी को माध्यम या विषय के रूप में जोड़ा जाए।
  2. अनिवार्यता: धीरे-धीरे इसे उच्च कक्षाओं में भी अनिवार्य किया जाएगा।
  3. समान नियम: यह आदेश राज्य के प्रत्येक सरकारी और प्राइवेट स्कूल पर समान रूप से लागू होगा।

REET और शिक्षक भर्तियों पर पड़ेगा बड़ा असर

इस ऐतिहासिक फैसले का सबसे बड़ा प्रभाव राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) पर पड़ेगा। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि शिक्षक भर्ती के सिलेबस में भी राजस्थानी भाषा को शामिल किया जाए। अब संभावना है कि राजस्थान में सरकारी शिक्षक बनने के लिए राजस्थानी भाषा का ज्ञान होना अनिवार्य हो जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

हाईकोर्ट का फैसला पलटकर दी बड़ी राहत

इससे पहले राजस्थान हाई कोर्ट ने इस याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया था कि यह सरकार का नीतिगत मामला है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे “संवैधानिक अधिकारों का मामला” मानते हुए हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया और राजस्थानी अस्मिता को जीत दिलाई।

सितंबर 2026 में देनी होगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई सितंबर 2026 में तय की है। तब तक राजस्थान सरकार को अपनी विस्तृत नीति और अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) पेश करनी होगी कि उन्होंने स्कूलों में राजस्थानी भाषा को लागू करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं।

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