राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और संगठन महामंत्री बीएल संतोष से मुलाकात की, जिसके बाद प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और लंबित राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लगभग आधे घंटे चली इन मुलाकातों में न केवल संगठन की मजबूती पर बात हुई, बल्कि विभिन्न बोर्डों, आयोगों और अकादमियों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए ‘हरी झंडी’ मिलने के भी संकेत हैं। माना जा रहा है कि पार्टी अब ‘नारी शक्ति’ और नए चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे सत्ता और संगठन में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।
वर्तमान में राजस्थान सरकार में कुल 24 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम 30 मंत्री बनाए जा सकते हैं। रिक्त पड़े इन 6 पदों को भरने के साथ ही कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की भी प्रबल संभावना है। इसके अतिरिक्त, जून में प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर भी दिल्ली में मंथन हुआ है। विधानसभा की संख्या बल के आधार पर भाजपा इनमें से दो सीटें जीत सकती है, जिसके लिए पार्टी किसी महिला चेहरे को प्राथमिकता दे सकती है। साथ ही, आगामी पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर भी मुख्यमंत्री ने आलाकमान को जमीनी फीडबैक दिया है।
राजनीतिक बैठकों के अलावा मुख्यमंत्री ने विकास परियोजनाओं को लेकर भी सक्रियता दिखाई। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटील से मुलाकात कर ‘जल जीवन मिशन’, ईआरसीपी (ERCP) और यमुना जल समझौते जैसी महत्वपूर्ण सिंचाई व पेयजल परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा की। इसके साथ ही, केंद्रीय शहरी विकास एवं ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के साथ हुई बैठक में जयपुर मेट्रो के फेज 2 व फेज 3 के विस्तार, विद्युत वितरण तंत्र में सुधार और ‘अमृत 2.0’ योजना के क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। सीएम के इस दिल्ली दौरे से साफ है कि राजस्थान में जल्द ही प्रशासनिक और राजनीतिक मोर्चे पर बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।
