केंद्र सरकार देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील डेटा को सुरक्षित रखने के लिए एक नई नीति पर विचार कर रही है। इसके तहत ऊर्जा, बैंकिंग और दूरसंचार जैसे प्रमुख क्षेत्रों की कंपनियों के लिए ‘मेड इन इंडिया’ क्लाउड का उपयोग अनिवार्य किया जा सकता है। इस कदम का उद्देश्य विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करना और वैश्विक तनाव की स्थिति में डेटा तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करना है।
क्यों पड़ी स्वदेशी क्लाउड की जरूरत?
सरकार के इस विचार के पीछे रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान घटी एक घटना प्रमुख कारण है। पिछले साल माइक्रोसॉफ्ट ने प्रतिबंधों के चलते रूस की एक तेल रिफाइनरी कंपनी की आईटी सेवाओं और डेटा एक्सेस को ब्लॉक कर दिया था। इससे सरकार को यह अहसास हुआ कि यदि विदेशी कंपनियां रातों-रात सेवाएं बंद कर दें, तो भारत की बैंकिंग, ऊर्जा और वित्तीय सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।
स्वदेशी क्लाउड के लाभ
- डेटा संप्रभुता: ‘सॉवरेन क्लाउड’ होने से भारत का अपनी डिजिटल बुनियादी सुविधाओं पर पूरा नियंत्रण रहेगा।
- सुरक्षा: घरेलू आईटी क्षेत्र को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ डिजिटल सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।
- आर्थिक विकास: घरेलू क्लाउड कंपनियों को सरकारी समर्थन मिलने से इस क्षेत्र में नया निवेश आएगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
चुनौतियां और भविष्य की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में भारतीय क्लाउड कंपनियां वैश्विक दिग्गजों के मुकाबले अभी उतनी बड़ी नहीं हैं। ऐसे में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सही नीति, पर्याप्त निवेश और सरकार के निरंतर समर्थन की आवश्यकता होगी।
राजस्थान अपडेट: इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश पर सरकार का फोकस
इसी बीच, जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने राज्य के विकास को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
- विकास का विजन: उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित राजस्थान’ के संकल्प को साकार करने के लिए पर्यटन, उद्योग और स्टार्टअप सेक्टर को मजबूत किया जा रहा है।
- निवेश की संभावनाएं: उन्होंने इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के राजस्थान चैप्टर के लॉन्च के अवसर पर कहा कि राजस्थान में निवेश और रोजगार बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।
- आधारभूत ढांचा: सरकार का मुख्य फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और आर्थिक रूप से प्रदेश को और अधिक सशक्त बनाने पर है।
