Expose Now Special Report: राजस्थान के 146 शहरों में मिटेगी पानी की प्यास, ‘जल-क्रांति’ के लिए सरकार का मेगा प्लान

राजस्थान के शहरी इलाकों में अब पानी के लिए दिनों का इंतजार बीते कल की बात होने वाली है। प्रदेश के जिन 146 शहरों और कस्बों में फिलहाल 48 से 96 घंटे के अंतराल पर जलापूर्ति हो रही है, वहां की तस्वीर बदलने के लिए राज्य सरकार ने ‘मिशन मोड’ पर काम शुरू कर दिया है। एक्सपोज नाउ के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक, जल संसाधन विभाग और जलदाय विभाग (PHED) इतिहास में पहली बार एक साझा रणनीति बनाकर धरातल पर उतर रहे हैं।

13 अप्रैल को ‘मंथन’: सचिवालय में जुटेगी आला अफसरों की फौज
आगामी 13 अप्रैल 2026 को जयपुर स्थित शासन सचिवालय में एक उच्च स्तरीय संयुक्त बैठक बुलाई गई है। इस बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त मुख्य सचिव (जल संसाधन) और प्रमुख शासन सचिव (PHED) करेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा उन शहरों की समीक्षा करना है जहाँ पेयजल का अंतराल 48 घंटे से अधिक है।

राजस्थान का ‘वॉटर प्रोफाइल’ एक नज़र में:-

-कुल शहरी नेटवर्क: ~310 कस्बे और शहर।
-व्यवस्थित योजनाएं: 256 शहरों में संचालित।
-स्रोतों का गणित: 85 शहर पूरी तरह बांध/नहर (सतही जल) पर निर्भर, 89 भूजल पर और 82 दोनों के मिश्रण पर।
-संकट का पैमाना: 103 शहरों में 48 घंटे, 29 शहरों में 72 घंटे और 14 शहरों में 96 घंटे का सप्लाई अंतराल।

हॉटस्पॉट्स के लिए ‘टारगेट 2027’: कहाँ, क्या होगा समाधान?

सरकार ने हर शहर की समस्या के अनुसार तकनीकी समाधान और समय सीमा (Deadline) तय की है:-

  1. गंभीर संकट वाले क्षेत्र (96 घंटे तक का अंतराल)

-मकराना, डीडवाना व लाडनूं: बीकानेर के RD 750 पर निर्माणाधीन एस्केप रिजर्ववायर से अतिरिक्त पानी मिलेगा। लक्ष्य: मार्च 2027।

-दौसा, बांदीकुई व बोरवाड़: यहाँ ईसरदा-दौसा परियोजना जीवनदायिनी बनेगी। इसके शुरू होते ही अंतराल घटकर 48 घंटे रह जाएगा।

-जोधपुर (पीपाड़, भोपालगढ़): RGLC फेज-III और RD 1121 रिजर्ववायर का काम अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

  1. मध्यम अंतराल वाले क्षेत्र (48-72 घंटे)

-किशनगढ़, सांभर व फुलेरा: बीसलपुर की समानांतर पाइपलाइन (TM-1) का काम सितंबर 2026 तक पूरा होगा।

-मेवाड़ (भिण्डर, कानोड़): जाखम बांध आधारित प्रोजेक्ट के लिए HAM मॉडल पर टेंडर जारी हो चुके हैं।

-जैसलमेर: बजट 2026 के तहत 196 करोड़ की लागत से मोहनगढ़-जैसलमेर ट्रांसमिशन सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा।

पुराना ढांचा और गिरता भूजल: संकट की असली जड़

एक्सपोज नाउ की पड़ताल बताती है कि राजस्थान में पेयजल संकट के 3 प्रमुख कारण हैं:-

जर्जर पाइपलाइन: बालोतरा और जालौर जैसे शहरों में पाइपलाइनें दशकों पुरानी और चोक हो चुकी हैं।

टेल एंड की समस्या: नागौर और जोधपुर के कई हिस्से नहर के अंतिम छोर पर होने के कारण प्यासे रह जाते हैं।

भूजल का जवाब देना: शेखावाटी और जयपुर के इलाकों में ट्यूबवेल अब सूखने के कगार पर हैं।

समाधान की ‘त्रिमूर्ति’ रणनीति:- सरकार इस संकट से निपटने के लिए तीन स्तरों पर काम कर रही है:

-अमृत 2.0: शहरों के भीतर वितरण नेटवर्क (पाइपलाइनों) का कायाकल्प।

-सतही जल शिफ्ट: भूजल के बजाय ईसरदा, जाखम और बीसलपुर जैसे बड़े बांधों पर निर्भरता बढ़ाना।

-एस्केप रिजर्ववायर: नहरों में बंदी या तकनीकी खराबी के दौरान भी सप्लाई न रुके, इसके लिए विशाल भंडारण कुंडों का निर्माण।

जलदाय विभाग और जल संसाधन विभाग का यह ‘साझा मंथन’ राजस्थान में जल प्रबंधन के नए युग की शुरुआत है। यदि ये प्रोजेक्ट समय पर पूरे होते हैं, तो 2027 तक राजस्थान के शहरी क्षेत्रों से ‘पानी के टैंकरों’ की कतारें गायब हो सकती हैं।

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