भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भीलवाड़ा जिले के मांडल थाने में तैनात एक कांस्टेबल के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है । आरोपी कांस्टेबल धर्मेन्द्र चौधरी (नंबर 468) पर आरोप है कि उसने एक परिवादी की पूर्व पत्नी द्वारा दिए गए परिवाद को रफा-दफा करने के बदले रिश्वत की मांग की थी ।
क्या है पूरा मामला? परिवादी नारायण गुर्जर ने ACB को शिकायत दी थी कि उसकी पूर्व पत्नी श्रीमती हीरा उर्फ हीरू ने उसके खिलाफ मांडल थाने में एक परिवाद दे रखा है । इस मामले की जांच कर रहे कांस्टेबल धर्मेन्द्र चौधरी ने परिवाद को सुलझाने के बदले ₹10,000 की रिश्वत मांगी ।
जूस की दुकान पर हुआ सत्यापन ACB की टीम ने जब इस शिकायत का गोपनीय सत्यापन करवाया, तो चौंकाने वाला तरीका सामने आया। कांस्टेबल ने सीधे मुंह से पैसे मांगने के बजाय अपने मोबाइल फोन पर ’10’ लिखकर परिवादी को दिखाया (जिसका अर्थ ₹10,000 था) । यह बातचीत मांडल थाने के सामने स्थित एक जूस की दुकान पर हुई ।
₹2,000 लेते ही कांस्टेबल को हुई शंका सत्यापन के दौरान परिवादी ने कांस्टेबल को ₹2,000 थमा दिए और बाकी पैसे बाद में देना तय हुआ । हालांकि, बाद में कांस्टेबल को ब्यूरो की कार्रवाई की भनक लग गई और उसने शेष राशि लेने से मना कर दिया । इसके बावजूद, ₹2,000 स्वीकार करने और रिश्वत की मांग की पुष्टि होने पर ACB ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत FIR दर्ज की है । मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह को सौंपी गई है ।
