जयपुर, मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन और अभिनेता वीर दास ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के दौरान मीडिया से खास बातचीत की। उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कॉमेडी के बदलते स्वरूप, ओटीटी के प्रभाव और अपनी हालिया फिल्म ‘हैप्पी पटेल’ की सफलता पर बेबाकी से अपनी राय रखी।
कॉमेडियन अब सिर्फ ‘साइडकिक’ नहीं, हीरो हैं
वीर दास ने बॉलीवुड में आ रहे बदलाव का स्वागत करते हुए कहा कि अब वह दौर बीत गया जब कॉमेडियन सिर्फ हीरो के साथ छोटे-मोटे किरदारों तक सीमित रहते थे। उन्होंने कहा, “अब कहानियाँ कॉमेडी को केंद्र में रखकर लिखी जा रही हैं। ‘खोसला का घोंसला’ और ‘भेजा फ्राय’ जैसा कंटेंट-ड्रिवन कॉमेडी फिल्मों का दौर एक बार फिर लौट रहा है।”
कॉमेडी का स्वाद और फराह खान का जादू
कॉमेडी के गिरते स्तर पर पूछे गए सवाल पर वीर ने दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “हर दर्शक का स्वाद अलग होता है—किसी को भिंडी सूखी पसंद है, किसी को गीली। मैं खुद फराह खान का बड़ा प्रशंसक हूँ। उनकी फिल्मों का कंटेंट भले ही बहुत बौद्धिक (Intellectual) न हो, लेकिन हर तीसरे सीन में दर्शक तालियां बजाते हैं। ‘तीस मार खान’ और ‘ओम शांति ओम’ इसके बेहतरीन उदाहरण हैं।”
आमिर खान और ‘हैप्पी पटेल’ का जिक्र
अपने करियर पर बात करते हुए वीर ने स्वीकार किया कि उन्हें अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। आमिर खान के साथ काम करने के अनुभव पर उन्होंने बताया कि आमिर बिना संतुष्टि के काम आगे नहीं बढ़ाते। वहीं अपनी नई फिल्म ‘हैप्पी पटेल’ की सफलता पर खुशी जताते हुए उन्होंने मजाक में कहा, “इस फिल्म का कुल बजट शायद बड़ी फिल्म ‘धुरंधर’ की कैटरिंग के बजट जितना ही था, लेकिन ओपनिंग उम्मीद से कहीं बेहतर रही।”
“साइलेंस सबसे बड़ा सटायर है”
अपने व्यंग्य करने के अंदाज पर वीर दास ने एक गहरी बात कही। उन्होंने कहा कि कलाकारों के लिए ‘खामोशी’ सबसे बड़ी प्रतिक्रिया है। “अगर दर्शक चुप हैं, तो वह बहुत कुछ कह देते हैं। कई बार खामोशी तालियों से ज्यादा सच्ची और गहरी प्रतिक्रिया होती है।”
किताब लेखन से तौबा और कंटेंट पर पाबंदी
लेखन के अनुभव को उन्होंने अभिनय से भी कठिन बताया और कहा कि एक छोटी किताब लिखने के संघर्ष के बाद अब वे दोबारा ऐसा जोखिम नहीं उठाएंगे। देश में कंटेंट पर पाबंदी के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में किसी भी कंटेंट को पूरी तरह रोकना असंभव है, क्योंकि भारतीय दर्शक दुनिया में सबसे समझदार हैं।
वीर दास के खास विचार:
- कलाकारों को सलाह: “जैसे हैं, वैसे ही रहें—Be Yourself।”
- ग्लोबल परफॉर्मर: वीर अब तक 32 देशों में शो कर चुके हैं और हर जगह निजी अनुभवों व सामाजिक बदलावों पर व्यंग्य पेश करते हैं।
