US Supreme Court: डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से लगा ‘तगड़ा झटका’; अब अपनी मर्जी से नहीं थोप पाएंगे ‘इंपोर्ट टैक्स’

By Admin

अमेअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को अपने दूसरे कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) से अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति के उन अधिकारों पर कैंची चला दी है, जिसके तहत वे “राष्ट्रीय आपातकाल” (National Emergency) का हवाला देकर दूसरे देशों से आने वाले सामानों पर अपनी मर्जी से टैरिफ (Import Tariff) बढ़ा देते थे।

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि संविधान के मुताबिक, कॉमर्स और ट्रेड पर टैक्स लगाने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ अमेरिकी संसद (Congress) के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं।

इन 5 पॉइंट्स में समझें कोर्ट का फैसला

  • सुप्रीम कोर्ट की रोक: कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) का इस्तेमाल करके अनिश्चितकाल के लिए नए ट्रेड टैरिफ नहीं थोप सकते।
  • संसद की शक्ति: जजों ने कहा कि संविधान का ‘आर्टिकल I’ संसद को वाणिज्य (Commerce) को विनियमित करने की शक्ति देता है। राष्ट्रपति इसे दरकिनार (Bypass) नहीं कर सकते।
  • ट्रंप की दलील खारिज: ट्रंप प्रशासन ने दलील दी थी कि “बॉर्डर सिक्योरिटी” और “इकॉनमी” को खतरा है, इसलिए टैरिफ जरूरी हैं। कोर्ट ने इसे नाकाफी माना।
  • मैक्सिको-चीन को राहत: ट्रंप ने मेक्सिको और चीन से आने वाले सामानों पर 25% तक टैक्स बढ़ाने की धमकी दी थी, जिस पर अब पानी फिर गया है।
  • व्यापार युद्ध टला: इस फैसले से अमेरिकी बाजारों और ग्लोबल इकोनॉमी ने राहत की सांस ली है, क्योंकि एक नए ‘ट्रेड वॉर’ (Trade War) का खतरा मंडरा रहा था।

क्या था पूरा मामला?

दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की थी कि वे मेक्सिको, कनाडा और यूरोपीय संघ (EU) से आने वाले स्टील और एल्युमीनियम पर भारी इंपोर्ट ड्यूटी लगाएंगे। इसके लिए उन्होंने 1977 के ‘इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ का सहारा लिया था। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका का व्यापार घाटा (Trade Deficit) कम करने के लिए यह जरूरी है।

इसके खिलाफ अमेरिकी इंपोर्टर्स और कई व्यापारिक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना था कि राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं।

अब ट्रंप क्या करेंगे?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप के हाथ बंध गए हैं। अब अगर उन्हें किसी देश पर आर्थिक प्रतिबंध या नया टैक्स लगाना है, तो उन्हें संसद (Congress) के पास जाना होगा। संसद में डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन सदस्य पहले ही ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों (Protectionist Policies) के खिलाफ हैं। ऐसे में ट्रंप के लिए अब अपनी मर्जी से ‘ट्रेड वार’ छेड़ना आसान नहीं होगा।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला न सिर्फ अमेरिकी राजनीति बल्कि वैश्विक बाजारों के लिए भी एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा।

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