उदयपुर जेल में ‘जुल्म’ का खुलासा: जेलर ने कैदियों को पट्टों से बेरहमी से पीटा, जज के सामने दिखाए शरीर पर चोट के निशान

उदयपुर: राजस्थान की जेलों में कैदियों की सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उदयपुर के झाड़ोल उप कारागृह में जेलर और जेल प्रहरियों द्वारा कैदियों को पट्टों से बेरहमी से पीटने का मामला सामने आया है। इस अमानवीय कृत्य का खुलासा मंगलवार को तब हुआ जब अतिरिक्त जिला जज (ADJ) और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुलदीप शर्मा जेल का औचक निरीक्षण करने पहुँचे।

निरीक्षण के दौरान कैदियों ने जज के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त की और अपने हाथ, पैर तथा पीठ पर लगे चोट के गहरे निशान दिखाए। कैदियों का आरोप है कि जेलर करण गरासिया और जेल प्रहरी उनके साथ जानवरों जैसा बर्ताव करते हैं और छोटी-छोटी बातों पर पट्टों से वार करते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीजे शर्मा ने तुरंत तीन कैदियों की लिखित शिकायत ली और उनका मेडिकल परीक्षण करवाया। इस मामले में झाड़ोल थाने में जेल प्रशासन के खिलाफ तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

अमानवीय स्थितियों में रह रहे बंदी

जेल में मारपीट के अलावा अन्य कई अनियमितताएं भी उजागर हुई हैं। कैदियों ने बताया कि बैरक में पंखे खराब पड़े हैं, जिससे इस बढ़ती गर्मी में उनका बुरा हाल है। जेल में क्षमता से अधिक भार है; जहाँ केवल 100 कैदियों की जगह है, वहाँ वर्तमान में 136 बंदी रखे गए हैं। इसके अलावा, जेल में पीने के पानी की भारी किल्लत है और कैदियों को पढ़ने के लिए कोई सामग्री या अखबार तक उपलब्ध नहीं कराया जाता। कैदियों ने यह भी शिकायत की कि बाहरी जिलों के होने के कारण उनकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नहीं कराई जा रही, जिससे उन्हें न्याय मिलने में देरी हो रही है।

जेलर की सफाई और कोर्ट का कड़ा रुख

दूसरी ओर, आरोपी जेलर करण गरासिया ने अपने बचाव में कहा कि कैदी आपस में झगड़ रहे थे, जिन्हें शांत करने के लिए ‘हल्का बल’ प्रयोग किया गया था। हालांकि, कैदियों के शरीर पर मौजूद गहरे घाव जेलर के दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। एडीजे कुलदीप शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जेल नियमों का उल्लंघन और कैदियों के साथ मारपीट एक गंभीर अपराध है और किसी भी दोषी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। मामले की विस्तृत रिपोर्ट जयपुर स्थित उच्चाधिकारियों को भेजकर विभागीय जांच और कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

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